Bihar Politics में CM Nitish Kumar का बड़ा खेल, BJP से रिश्ता तोड़ RJD-Congress संग बनाई JDU ने सरकार

Bihar Politics में CM Nitish Kumar का बड़ा खेल, BJP से रिश्ता तोड़ RJD-Congress संग बनाई JDU ने सरकार

महाराष्ट्र में खेल करने वाली भाजपा के साथ बिहार में बड़ा खेला हो गया। सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने बीजेपी से अपना गठबंधन तोड़ लिया और महागठबंधन के साथ अपना नाता जोड़ लिया। अब जल्द ही बिहार में महागठबंधन की नयी सरकार होगी। यानी भाजपा बिहार की सत्ता से बाहर हो गयी है। वैसे पहले से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि नीतीश कुमार भाजपा के साथ अपना रिश्ता तोड़कर एक नई शुरुआत कर सकते हैं। जदयू के राजद, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर नई सरकार का गठन करने के स्पष्ट संकेत उभर रहे थे। और जब 7 अगस्त को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग की बैठक में भी सीएम नीतीश कुमार नहीं आये, तो यह तय हो चुका था कि अब वह भाजपा खेमे में भी नज़र नहीं आएंगे। कारण, कोरोना से संक्रमित होने के कारण इस बैठक में शामिल नहीं होने वाले नीतीश इसी दिन पटना में सार्वजनिक कार्यक्रम में मंत्रियों के साथ शिरकत करते दिखे। इससे पहले जब जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपने पूर्व अध्यक्ष राम चंद्र प्रताप सिंह यानी आरसीपी सिंह) को भ्रष्टाचार के आरोपों पर नोटिस जारी किया, तब भी इसे भाजपा-जदयू के बीच गठबंधन के अंतिम सांस लेने बतौर देखा गया था। गौरतलब है कि जदयू नेता ललन सिंह ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर यह आरोप लगाया था कि आरसीपी सिंह बिहार में वही भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे थे, जो महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने निभाई थी। पार्टी के 24 से ज्यादा विधायकों से उनके संपर्क करने की बातें भी कही गयीं जिन्हें कथित तौर पर 6 करोड़ रुपये और मंत्रिपद की पेशकश की गयी थी ताकि वे जदयू छोड़ भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने का रास्ता साफ़ करें। इस मुहीम में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव उनसे संपर्क और चीज़ें तय करने की ज़िम्मेदारी निभा रहे थे। भाजपा की यह योजना सफल होती उससे पहले ही भांडा फुट गया और नीतीश ने बीजेपी से नाता तोड़ महागठबंधन के साथ सरकार बनाने का फैसला कर उसे ही बड़ा झटका दे दिया। बहरहाल नीतीश कुमार के राजद के साथ सरकार बनाने के निर्णय से भाजपा की उन कोशिशों को बड़ा झटका लगा है जिसमें पार्टी 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर बेहद गंभीरता के साथ तैयारी में जुट गई थी। बिहार से अकेले 40 लोकसभा सीटें आती हैं। राज्य के मतदाताओं में जातीय आधारों पर इतना बड़ा बिखराव है कि भाजपा अब अकेले के दम पर बड़ी कामयाबी हासिल करने के बारे में नहीं सोच सकती। जदयू, आरजेडी और अन्य पार्टियों के साथ आने से राज्य में एनडीए को तगड़ा झटका लगा है। दरअसल, बिहार भाजपा नेताओं के मन में सरकार बनने के समय से ही यह कसमसाहट बनी हुई थी कि उनके खाते में ज्यादा सीटें होने के बाद भी उन्हें नीतीश कुमार का दबाव झेलना पड़ रहा था। पार्टी नेता चाहते थे कि अब राज्य में उनका मुख्यमंत्री होना चाहिए। धीरे-धीरे यह आवाज बड़ी नाराजगी में तब्दील होती गई। समय-समय पर जदयू-भाजपा नेताओं के बीच का मनमुटाव बढ़ता गया और यह बिहार विधानसभा के पटल पर भी देखा गया। इसी नाराजगी के बीच महाराष्ट्र प्रकरण के बाद बिहार भाजपा के नेताओं को लग रहा था कि यदि वे शिवसेना की तर्ज पर जदयू में तोड़फोड़ करने में कामयाब हो जाते हैं तो वे बिहार की बाजी पलट सकते हैं। वहीं जदयू लगातार ऐसी चीज़ों पर नज़र रख रही थी। उसने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को लगातार अपनी नाराज़गी का संकेत भी दिया मगर भाजपा अपनी चाल से पीछे नहीं हटती दिख रही थी। अपनी नाराज़गी का अहसास कराने के लिए ही बीते कुछ महीने में नीतीश ने कई अहम बैठकों से दूरी बनाई। कुछ महीने पूर्व नीतीश पीएम की कोरोना पर बुलाई गई बैठक से दूर रहे। हाल में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सम्मान में दिए गए भोज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह से भी दूरी बनाई। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह की ओर से बुलाई गई मुख्यमंत्रियों की बैठक से दूरी बनाने के बाद रविवार को नीति आयोग की बैठक से भी दूर रहे। लेकिन सरकार चलाने में फ्री हैंड नहीं मिलने के अलावा चिराग प्रकरण के बाद अब आरसीपी प्रकरण के कारण नीतीश भाजपा से इतने खफा हो गए कि उन्हें यह बड़ा फैसला लेना पड़ा। #BiharPolitics #NitishKumar #JDU-BJP #नीतीश_कुमार #BiharPoliticalCrisis #CMNitishResigns #JDU #BJP #RJD #Congress #LaluPrasadYadav #tejashwiyadav #newindiaherald #JDU-RJD #tejasvi_yadav #tejaswiyadav #nda #mahagathbandhan