#shastraswaroop #iskconhanumangarh #iskconsardarsahar #chaitanyacharitamrita चैतन्य का शाब्दिक अर्थ है " जीवन्त शक्ति, " चरित का अर्थ है "चरित्र" और अमृत का अर्थ है "अमर" सजीव प्राणी होने के नाते हम हिलडुल सकते हैं, किन्तु एक मेज ऐसा नहीं कर सकती, क्योंकि उसमें जीवनी शक्ति नहीं है। गति ( हिलना-डुलना) तथा क्रियाशीलता को जीवनी शक्ति का चिह्न या लक्षण माना जा सकता है। निस्सन्देह, यह कहा जा सकता है कि जीवनी शक्ति के बिना कोई क्रियाशीलता नहीं आ सकती। यद्यपि भौतिक अवस्था में जीवनी शक्ति रहती है, किन्तु वह अमृत अर्थात् अमर नहीं होती। अतएव चैतन्य - चरितामृत शब्दों का अनुवाद “जीवन्त शक्ति का अमर चरित्र" के रूप में किया जा सकता है।