श्रीमद् भागवत गीता अध्याय दस श्री भगवान का ऐश्वर्य श्लोक ३४ ओर ३५ #गीताश्लोक #bhagwargeeta

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय दस श्री भगवान का ऐश्वर्य श्लोक ३४ ओर ३५ #गीताश्लोक #bhagwargeeta

श्रीमद् भागवत गीता अध्याय दस श्री भगवान का ऐश्वर्य श्लोक ३४ ओर ३५ #गीताश्लोक #bhagwargeeta श्लोक ३४ मृत्युः सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम् । कीर्तिः श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा ॥ अर्थात : मैं सर्वभक्षी मृत्यु हूँ और मैं ही आगे होने वालों को उत्पन्न करने वाला हूँ। स्त्रियों में मैं कीर्ति, श्री, वाक्, स्मृति, मेघा, धृति तथा क्षमा हूँ। श्लोक ३५ बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् । मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥ अर्थात : मैं सामवेद के गीतों में बृहत्साम हूँ और छन्दों में गायत्री हूँ। समस्त महीनों में मैं मार्गशीर्ष (अगहन) तथा समस्त ऋतुओं में फूल खिलाने वाली वसन्त ऋतु हूँ।