शनिवार व्रत उद्यापन विधि जितने भी व्रत करने का आपने संकल्प किया था उतने शनिवार के व्रत के बाद उद्यापन करना चाहिए। शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। स्नान के पानी में काले तिल या गंगाजल मिलाकर नहा सकते हैं। साथ में "ॐ प्राम प्रीम प्रौम सः शनैश्चराय नमः " का जाप करें। इसके बाद पश्चिम दिशा में एक चौकी बिछाएं उस पर काले रंग का कपड़ा रख दें। उस वस्त्र को शनिदेव का ध्यान करते हुए उन्हें अर्पित करें। चूंकि शनि देव की घर में पूजा का विधान नहीं है। ऐसे में उनकी प्रतिमा की स्थापना नहीं करनी है और न ही घर के मंदिर में उनकी पूजा की जायेगी। पश्चिम दिशा शनिदेव की है तो आपको उसी दिशा में चौकी पर मानसिक रूप से शनिदेव की पूजा करते हुए व्रत का उद्यापन विधि से करना है। शनिदेव का ध्यान करते हुए धूप, दीप, नैवेद्य आदि चौकी पर रखें। इसके बाद शनिदेव के मंत्रों का जाप करें। शनि चालीसा का पाठ करें। अगर आपको अन्य कोई मंत्र या पाठ के बारे में नहीं पता है तो बीज मंत्र का जाप करना भी शुभ है। बीज मंत्र है: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। सामान्य मंत्र- ॐ शं शनैश्चराय नमः। शनि महामंत्र- ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥ शनि देव के मंदिर जाकर उन्हें सरसों का तेल चढ़ाएं और गेंदे का पुष्प अर्पित करें। फिर काली उड़द की दाल से बनी चीजों का भोग अर्पित करें। अब शनिदेव की आरती कर भोग को प्रसाद के रूप में बांट दें। बता दें कि शनिवार व्रत के उद्यापन के बाद दान का काफी महत्व बताया गया है। शनिवार का व्रत बिना दान के कभी भी फल प्राप्त नहीं होता है।