जीवित्पुत्रिका व्रत कथा और पूजा विधि, जितिया कथा, जीमूतवाहन कथा अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है। जीवित्पुत्रिका व्रत को जिउतिया, जितिया या ज्युतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, समृद्धि और उन्नत जीवन के लिए इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। मान्यताओं के अनुसार संतान के लिए किया गया यह व्रत किसी भी बुरी परिस्थिति में उसकी रक्षा करता है। संतान प्राप्ति की कामना के लिए भी यह व्रत रखा जाता है। जितिया व्रत निर्जला उपवास करने से एक दिन पहले नहाय खाय कि विधि की जाती है। इसमें सुबह सबसे पहले स्नान किया जाता है उसके बाद कई जगह व्रती मछली, मडुआ की रोटी खाती हैं। इस व्रत में भगवान जीमूत वाहन, गाय के गोबर से चील-सियारिन की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत में एक छोटा सा तालाब बनाकर पूजा की जाती है। vrat katha,vrat katha in hindi,Jiitiya,Jiutiya,जितिया,jivitputrika vrat Katha,जिउतिया व्रत,जिउतिया व्रत की एक पौराणिक कथा,Jitiya Vrat katha in Hindi,Jeevitputrika Vrat Katha,Jeevitputrika vrat,Jitiya Vrat,Jiyutiya Vrat,Jivitputrika Vrat Story,Jimutvahana,jivitputrika vrat,jitiya fasting,ashwin month,Jivitputrika Vrat Katha,Jivitputrika Vrat Pujan Vidhi,Health Tips,Home Remedy,Health News,Beauty Tips,Vastu Tips,vastu,Jivitputrika Vrat KI Kahani