डाला छठ पर व्रती महिलाओं के बीच पहुंची विधायक बंदना सिंह, क्षेत्र की सुख शांति के लिए की प्रार्थना।

डाला छठ पर व्रती महिलाओं के बीच पहुंची विधायक बंदना सिंह, क्षेत्र की सुख शांति के लिए की प्रार्थना।

आज़मगढ़। सगड़ी। लोक आस्था का महापर्व  छठ पूजा बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर पूरे देश मेंं धूमधाम से मनाया जा रहा है । 11 नवंबर को नहाए खाए से छठ पूजा की शुरुआत हुई । वहीं 12 नवंबर को महिलाओं ने खरगा व्रत रखा । तीसरे दिन मंगलवार की शाम व्रत रही महिलाओं ने घाटों पर पहुंचकर शुभ मुहूर्त में जल में खड़े होकर अस्त होते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया। इस महापर्व के मौके पर आज़मगढ़ जनपद के सगड़ी तहसील स्थित जीयनपुर कोइरिया पोखरे पर डाला छठ पर आज व्रती महिलाओं के बीच सगड़ी विधायक बन्दना सिंह पहुँची और हर बेदी पर जाकर मुलाकात की तथा क्षेत्र की सुख शांति के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उन्होंने कहा कि- डाला छठ श्रद्धा और विश्वास का पर्व है, इस व्रत को करने या फिर सच्चे मन से छठ माता और सूर्यदेव की पूजा करने से घर में सुख-शांति रहती है। छठ को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है, छठ व्रत अगर शुद्ध मन और शुद्ध शरीर के साथ पूरा हो तो छठ मईया सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं. छठ पूजा वास्तविक रूप में प्रकृति की पूजा है। इस अवसर पर सूर्य भगवान की पूजा होती है, जिन्हें एक मात्र ऐसा भगवान माना जाता है जो दिखते हैं। अस्तलगामी भगवान सूर्य की पूजा कर यह दिखाने की कोशिश की जाती है कि जिस सूर्य ने दिनभर हमारी जिंदगी को रौशन किया उसके निस्तेज होने पर भी हम उनका नमन करते हैं। छठ पूजा के मौके पर नदियां, तालाब, जलाशयों के किनारे पूजा की जाती है जो सफाई की प्रेरणा देती है। यह पर्व नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने का प्रेरणा देता है। इस पर्व में केला, सेब, गन्ना सहित कई फलों की प्रसाद के रूप में पूजा होती है। सूर्य उपासना और छठी मैया की पूजा के लिए चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का इतिहास भी बहुत पुराना है. पुराणों में ऐसी कई कथाएं हैं जिसमें मां षष्ठी संग सूर्यदेव की पूजा की बात रही गयी है, फिर चाहे वो त्रेतायुग में भगवान राम हों या फिर सूर्य के समान पुत्र कर्ण की माता कुंती. छठ पूजा को लेकर परंपरा में कई कहानियां प्रचलित हैं. By: Samachar india live