भगवान शिव की महिमा का अद्भुत वर्णन करने वाला शिव रुद्राष्टकम प्रस्तुत है, जिसे कवि Kumar Vishwas ने अपनी प्रभावशाली वाणी में प्रस्तुत किया है। यह दिव्य स्तुति भगवान महादेव की अनंत शक्ति, करुणा और कल्याणकारी स्वरूप का स्मरण कराती है। श्रवण करें इस पावन शिव मंत्र, रुद्राष्टकम पाठ और महादेव की भक्ति में स्वयं को समर्पित करें। यह प्रस्तुति आपके मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक आनंद से भर देगी। #KumarVishwas #Rudrashtakam #Shivji #DrKumarvishwas #Namamishamishan डॉ. कुमार विश्वास की ओजस्वी वाणी में प्रस्तुत दिव्य स्तुति शिव रुद्राष्टकम- नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेद स्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाश माकाशवासं भजेऽहम् ॥ १॥ निराकारमोंकार मूलं तुरीयं गिरा ज्ञान गोतीतमीशं गिरीशम् । करालं महाकालकालं कृपालं गुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥ २॥ तुषाराद्रिसंकाशगौरं गभीरं मनोभूतकोटिप्रभा श्रीशरीरम् । स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारुगंगा लसद् भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा ॥ ३॥ चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम् । मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ॥ ४॥ प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशम् अखण्डम् अजं भानुकोटिप्रकाशम् । त्रयः शूलनिर्मूलनं शूलपाणिं भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम् ॥ ५॥ कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी । चिदानन्द सन्दोहमोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ॥ ६॥ न यावद् उमानाथ पादारविन्दं भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् । न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम् ॥ ७॥ न जानामि योगं जपं नैव पूजां नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम् । जराजन्म दुःखौघ तातप्यमानं प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो ॥ ८॥