फर्जी लाइसेंस और एक्सपीरियंस लैटर वालों को थमाई नौकरियां

फर्जी लाइसेंस और एक्सपीरियंस लैटर वालों को थमाई नौकरियां

13 साल की उम्र में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने का कारनामा उजागर 18 साल वाले को 3 साल के अनुभव के साथ दे दी पक्की नौकरी HSSC के नकारा सिस्टम की एक बार फिर पोल खुली प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा शेर नौकरियां देने के दावे की एक बार फिर पोल खुल गई है ड्राइवर भर्ती में जारी फाइनल लिस्ट में ऐसे लोगों का चयन किया गया है जो फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस वह एक्सपीरियंस लेटर के बलबूते पर नौकरी हासिल कर गए खास बात यह है कि दस्तावेजों के अनुसार चयनित एक प्रार्थी ने 13 साल की उम्र में लाइट ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया 15 साल की उम्र में हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया और 3 साल हैवी व्हीकल चलाने का एक्सपीरियंस लेटर लेते हुए साडे 18 साल की उम्र में सरकारी ड्राइवर की नौकरी भी हासिल कर ली इसी तरह 19 और 22 साल के लोगों को भी ड्राइवर भर्ती कर दिया गया जबकि नियमों के अनुसार 23 साल से पहले कोई भी व्यक्ति सरकारी ड्राइवर की न्यूनतम योग्यता को पूरा नहीं कर सकता है ड्राइविंग के नियमों के अनुसार 16 साल की उम्र में लर्निंग और लाइट हैवी लाइसेंस बनता है उसके बाद 18 साल की उम्र में लाइट लाइसेंस बनता है 20 साल की उम्र में हैवी लाइसेंस हासिल करने की शर्त पूरी होती है और उसके बाद 3 साल के हैवी व्हीकल चलाने के इसके बाद ही सरकारी बसों का ड्राइवर लगने की शर्ट पूरी होती है लेकिन HSSC ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि उसके नकारा सिस्टम में कोई सुधार नहीं होगा कई बार कोर्ट की डेट खाने और जमाने चलने के बावजूद एचएसएससी की वर्किंग में कोई सुधार देखने को नहीं मिला है HSC ने ड्राइवर भर्ती मामले में एक ही दिन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और ड्राइविंग टेस्ट लिए थे। सारे डॉक्यूमेंट पूरे करने वालों को ही ड्राइविंग टैस्ट मैं शामिल होने की अनुमति दी जानी थी अगर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करने वालों ने ईमानदारी के साथ डॉक्यूमेंट चेक किए होते तो इस तरह फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और अनुभव प्रमाण पत्र वाले लोगों का चयन किसी भी हालत में संभव ही नहीं था जाहिर सी बात है कि इस मामले में पूरी लापरवाही करते हुए अपने जानकारों या शिफारशी लोगों को नौकरी देने का षड्यंत्र रचा गया। इस फर्जीवाड़े का पता चलते ही नौकरी नहीं पाने वाले लोगों ने हाईकोर्ट का रास्ता अख्तियार किया और अब सरकार को 1 अप्रैल को इसके बारे में जवाब देना है कि किस तरह से जाली ड्राइविंग लाइसेंस और अनुभव प्रमाण पत्र वाले लोग ड्राइवर की नौकरी पा गए खास बात यह भी है कि ड्राइवर भर्ती मामले में ही 17 लोगों ने शिकायत की है कि उन्होंने ड्राइवर का टेस्ट पास किया था लेकिन उनको फेल कर दिया गया इसके अलावा 189 लोगों ने अपने ड्राइविंग के टेस्ट की वीडियो देखने के लिए अप्लाई किया था ₹5000 की फीस देने के बाद इन लोगों ने जब अपने टेस्ट देखे तो 24 लोगों की वीडियो क्लिप ही नहीं मिली इसकी शिकायत भी हाईकोर्ट में की गई तो सरकार ने कहा कि संबंधित कंपनी ने उनको अभी पूरा डाटा उपलब्ध नहीं कराया है जिसके कारण वह वीडियो क्लिप देखने वाले लोगों को काटुन का टेस्ट दिखाने में सफल नहीं हो पा रहे हैं मामले में कोर्ट से 4 सप्ताह का समय मांगा है ड्राइवर भर्ती शुरू से ही विवादों के घेरे में फंसी हुई है सिरसा के रोडवेज विवाह के एक बड़े अधिकारी का टेस्ट पास करने की एवज में पैसे मांगने का वीडियो वायरल हुआ था जिसके चलते उस अधिकारी को निलंबित भी किया गया था अंबाला कैथल और शिक्षा जिलों में ड्राइविंग टेस्ट देने वाले लोगों का यह आरोप था कि तीनों जगह अलग-अलग मामलों के अनुसार टेस्ट लिए गए जिसके चलते काबिल लोग लोगों को टेक्स्ट से सील किया गया और लोगों को पास किया गया। ड्राइवर भर्ती में बारिश का है तो के चलते कोर्ट के आदेश पर सरकार को 200 से अधिक पदों को रखना पड़ा है और उसके लिए शिकायत करने वाले युवाओं को दोबारा से भर्ती प्रक्रिया में शामिल करना मजबूरी होगी । प्रदेश सरकार बार-बार यह दावे करती है कि वह पूूरे फेयर सिस्टम के जरिए भर्ती कर रही है लेकिन ड्राइवर भर्ती मामले में 18, 19 ओर 21 साल के लोगों का चयन होना इस बात का प्रतीक है कि भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा अभी भी चल रहा है और सरकार उस पर लगाम लगाने में फेल साबित हुई है। खरी खरी बात यह है कि भाजपा सरकार में पहले की सरकारों के मुकाबले नौकरियों के चयन के सिस्टम में पारदर्शिता का आगाज तो किया गया है लेकिन अभी भी HSSC के नकारापन और खराब सिस्टम के चलते भर्तियों में पूरी पारदर्शिता हासिल नहीं हो पा रही है । इसी कारण हजारों भर्तियां कोर्ट में लटक गई है और कई कई सालों से फाइनल रिजल्ट पाने को तरस रही हैं। इसी कारण लाखों युवा रोजगार पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं और अपना हक हासिल करने के लिए सड़कों पर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। नकारा लोगों को नौकरियों के चयन की जिम्मेदारी देने के चलते न तो समय पर नौकरियां दी जा रही है और ना ही सो फ़ीसदी पारदर्शिता का दावा पूरा हो पा रहा है। अगर CM मनोहर लाल खट्टर इस देखना चाहते हैं तो उसे नकारा लोगों को बाहर का रास्ता दिखाते हुए रिजल्ट ओरिएंटेड लोगों को ही पोस्टों पर बैठाकर पूरे सिस्टम को नए सिरे से परफेक्ट बनाने का काम करके दिखाना होगा। यह किए बिना भाजपा सरकार बिना भ्रष्टाचार और बिना भेदभाव रोजगार देने के अपने दावे को कभी पूरा नहीं कर पाएगी।