#upsc #Pcs #All_exam #SSC #CAPF #NDA #IBPS #RBI #CDS #IAS #UPSC #bpsc #uppcs #mppcs #rpsc #jpsc #iasanalysis #अब_आप_पाए_कोचिंग_से_मुक्ति NCERT HISTORY 6 to 12 CLASS DETAILS ANALYSIS - https://bit.ly/2SJk0IQ BPSC PREVIOUS 20 YEAR QUESTION AND SOLUTION - https://bit.ly/3ebnmOX PDF ke liye - Please join telegram-https://t.me/ias_analysis Whatsapp-7257984076 WORLD HISTORY PLAYLIST-https://bit.ly/36lO1Tv संपूर्ण प्राचीन भारत का इतिहास PLAYLIST - https://tinyurl.com/ydyrvo7p 1 YEAR CURRENT AFFAIR GHATNA CHAKRA POINTER- https://bit.ly/3cFBHSo 66 BPSC/UPPSC 2020 HISTORY-https://bit.ly/2vphxvr 66 BPSC/UPPSC 2020 POLITY-https://bit.ly/2PHqJlu WORLD GEOGRAPHY(PHYSICAL GEOGRAPHY) PLAYLIST-https://bit.ly/38TSpL7 PRELIMS BOOSTER 2020-https://bit.ly/2sw1ydk घटना चक्र PLAYLIST FOR ALL SUBJECT - https://bit.ly/2rua63V घटना चक्र PLAYLIST FOR GEOGRAPHY- https://bit.ly/36f0SI1 घटना चक्र PLAYLIST FOR POLITY - https://bit.ly/37ByVdT OLD ANCIENT HISTORY PLAYLIST - https://bit.ly/2sMqRI5 पुर्तगाली 17 मई, 1498 को जलमार्ग से सर्वप्रथम पुर्तगाली नाविक वास्को-डि-गामा भारत आया था। भारत के लिए समुद्रीमार्ग की खोज का श्रेय पुर्तगालियों को ही दिया जाता है। वास्को-डि-गामा समुद्रीमार्ग से भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कालीकट नामक स्थान पर आया। वहां का तत्कालीन हिन्दू शासक जमोरिन था। जमोरिन ने ही कालीकट पर वास्कोडिगामा का स्वागत किया था। वास्को-डि-गामा को व्यापार करने की सुविधा जमोरिन ने ही प्रदान की थी। यूरोपियों का भारत में आने का मुख्य मकसद व्यापार करना था। वास्को-डि-गामा ने ‘केप ऑफ गुड़ होप‘ के रास्ते भारत तक के समुद्री मार्ग की खोज की थी। 1505 ई. में फ्रांसिस्को-डि-अल्मीडा नामक पुर्तगाली को भारत में पुर्तगाली क्षेत्रों का अधिकृत गवर्नर बनाकर भेजा गया। फ्रांसिस्को-डि-अल्मीडा को हिन्द महासागर में व्यापार पर पुर्तगालियों का नियंत्रण स्थापित करना था पर वह इसमें असफल रहा और 1509 ई. में वापिस पुर्तगाल चला गया। डच (हॉलैंड) डच लोग जोकि हॉलैंड के निवासी थे 1596 ई. में भारत आये थे। डचों ने 1602 ई. में डच ईस्ट इंडिया कम्पनी की स्थापना भी की थी। डचों द्वारा ही भारत से व्यापार हेतु सर्वप्रथम संयुक्त पूंजी कम्पनी शुरू की गयी थी। बंगाल के चिनसुरा में डचों ने एक कारखाना भी स्थापित किया था। डच लोगों का मुख्य उद्देश्य दक्षिण-पूर्वी एशिया के टापुओं पर व्यापार करना था भारत उनके व्यापारिक मार्ग में पड़ने वाली बस एक कड़ी था। 17 वीं शताब्दी में डच व्यापारिक शक्ति चरम पर थी। डच लोग भारत से सूती वस्त्र, अफीम, रेशम तथा मसालों आदि महत्वपूर्ण वस्तुओं का निर्यात करते थे। 1759 ई. में अंग्रेजों और डचों के मध्य बेदरा का युद्ध हुआ था, जिसमें डच इतनी बुरी तरह हारे की भारत से उनके पैर ही उखड गए। यही कारण था कि 18 वीं शताब्दी में अंग्रेजों (ब्रिटिश) के सामने डचों की शक्ति क्षीण पड़ गयी। अंग्रेज (ब्रिटिश) इसी कंपनी से 1608 ई. में कैप्टन हॉकिन्स तत्कालीन मुग़ल शासक जहांगीर के दरबार में इंग्लैंड का राजदूत बनकर आया था। भारत में अपने व्यापार को बढ़ाने के उद्देश्य से हॉकिन्स ने सूरत में बसने की गुजारिश की और जहांगीर को उपहार स्वरूप दस्ताने और इंग्लैंड में प्रयोग की जाने वाली बग्घी दी। जिससे प्रशन्न होकर जहांगीर ने कैप्टन हॉकिन्स को ‘इंग्लिश खां‘ की उपाधि प्रदान की थी। पुर्तगालियों और अन्य स्थानीय व्यपारियों के विरोध के कारण जहांगीर चाहकर भी अंग्रेजो को सूरत में बसने की आज्ञा न दे सका। फलस्वरूप अंग्रेजों ने बल पूर्वक 1611 ई. में कैप्टन मिडल्टन द्वारा स्वाली या स्वाळी नामक जगह पर पुर्तगालियों के जहाजी बेड़े को हराकर भगा दिया जिसके परिणामस्वरूप 1613 ई. में जहांगीर ने फरमान जारी कर अंग्रेजों को सूरत में स्थायी व्यापारिक कोठी बनाने की आज्ञा दे दी। ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा 1613 ई. में पहला कारखाना सूरत में स्थापित किया गया था। अंग्रेजों द्वारा पहली व्यापारिक कोठी 1611 ई. में मुसलीपट्टनम में खोली गयी थी। 23 जून, 1757 ई. में हुए प्लासी के युद्ध के बाद अंग्रेजों का भारत पर पूर्णतः प्रभुत्व हो गया था। प्लासी का युद्ध ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी तथा बंगाल के नवाब सिराज़ुद्दौला के बीच हुआ था, जिसमें अंग्रेज सेना का नेतृत्व राबर्ट क्लाइव द्वारा किया गया था, ततपश्चात 22 अक्टूबर, 1764 में हुए बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों की जीत के बाद भारत में कोई भी ऐसी राजनितिक शक्ति या शासक शेष नहीं बचा जो अंग्रेजों को हरा सके। बक्सर का युद्ध बक्सर नगर के पास ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मुगल नवाबों (बंगाल के नबाब मीर कासिम, अवध के नबाब शुजाउद्दौला, तथा मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना) के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में अंग्रेजों का नेतृत्व मेजर हेक्टर मुनरों ने किया था। फ्रांसीसी 1664 ई. में लुई 14 के शासनकाल में कॉलबर्ट द्वारा ‘फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनी‘ की स्थापना की थी। 1668 ई. में फ़्रांसिसी कैरो द्वारा औरंगजेब से आज्ञा प्राप्त कर सूरत में फ्रांसीसियों ने पहली फैक्ट्री स्थापित की थी। 1669 ई. में फ्रांसीसियों ने गोलकुण्डा के सुल्तान की स्वीकृति प्राप्त करके मूसलीपट्ट्नम में अपनी दूसरी फ़ैक्ट्री स्थापित की थी।