कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि ॥47॥ : तुम्हें अपने निश्चित कर्मों का पालन करने का अधिकार है लेकिन तुम अपने कर्मों का फल प्राप्त करने के अधिकारी नहीं हो, तुम स्वयं को अपने कर्मों के फलों का कारण मत मानो और न ही अकर्मा रहने में आसक्ति रखो। यह भगवद्गीता का अत्यंत प्रसिद्ध श्लोक है और भारतीय विद्यालयों के अधिकतम छात्र इस श्लोक से भली-भांति परिचित हैं। यह कार्य को निष्काम भाव से करने की अन्तर्दृष्टि प्रदान करता है और प्रायः कर्म योग के विषय पर चर्चा के दौरान इसका उल्लेख किया जाता है। इस श्लोक में कर्मयोग के संबंध में चार उपदेश दिए गए हैं-(1) तुम अपना कर्म करो लेकिन इसके फल की चिन्ता न करो, (2) तुम्हारे कर्म का फल तुम्हारे सुख के लिए नहीं है अर्थात तुम अपने कर्मों के फल के भोक्ता नहीं हो, (3) यहाँ तक कि कर्म करते समय कर्ता होने का अहंकार न करो, (4) अकर्मण्य रहने में आसक्ति न रखो। कर्म करो परन्तु फल की चिन्ता न करोः हमें अपना कर्म करने का अधिकार है लेकिन इसका फल हमारे प्रयासों पर निर्भर नहीं है। परिणाम के निर्धारण या सुनिश्चिता में हमारे प्रयत्न, भाग्य अर्थात हमारे पूर्वकर्म, भगवान की इच्छा, अन्य लोगों के प्रयास, संबंद्ध मनुष्यों के समेकित कर्म, स्थान और परिस्थितियाँ आदि अनेक प्रकार के तत्त्वों की भूमिका होती है फिर भी यदि हम परिणाम के लिए चिन्तित होते हैं और जब हमें ये हमारी इच्छा के अनुरूप नहीं मिलते तब हम चिन्ताग्रस्त हो जाते हैं। इसलिए श्रीकृष्ण अर्जुन को फल की चिन्ता करने के स्थान पर केवल शुभ कर्म करने पर अपना ध्यान केन्द्रित करने का उपदेश देते हैं। वास्तव में जब हम परिणाम की चिन्ता नहीं करते तब हम अपने प्रयासों पर पूरा ध्यान केन्द्रित करने में समर्थ हो पाते हैं जिसके परिणाम पहले से अधिक उत्तम होते हैं। इसके लिए हास्यास्पद संक्षिप्त शब्द उक्ति एन.ए.टी.ओ. 'नेटो' (नॉट अटैच्ड टू ऑउटकम) जिसका अर्थ है-परिणाम के प्रति आसक्ति का न होना। इसे प्रतिदिन की साधारण गतिविधि के समान समझना चाहिए जैसे कि गोल्फ खेलना। जब लोग गोल्फ खेलते हैं तब वे उसके परिणाम में रुचि लेते हैं चाहे उनका स्कोर कम या अधिक आदि क्यों न हो। यदि वे केवल अपनी क्षमता के अनुसार अपना शॉट खेलने पर ध्यान केन्द्रित करते हैं तब उन्हें प्रतीत होगा कि गोल्फ अत्यंत रोमांचक खेल है जिसे उन्होंने पहले कभी इस प्रकार से नहीं खेला। इसके अतिरिक्त यदि वे खेले जाने वाले शॉट पर पूरा ध्यान केन्द्रित करते हैं तब वे अपने खेल को और ऊंचाईयों तक ले जाएंगे। नमस्ते जी 🙏🙂 योगा बाबा मनोज सिंह आर्य : 882014016 Please follow and share To know more WhatsApp= https://wa.me/message/E7N3OGYAYPTRP1 YouTube = / @yogyatrawithmanojsingharya7527 Instagram = https://instagram.com/drmanojsinghary... Facebook= / manoj.singh.12