आशीर्वाद | सुदर्शन की कहानी | Aashirwad | Story By Sudarshan | kathantar naarrate by Pinki Sharma लाजवंती के यहाँ कई पुत्र पैदा हुए; मगर सब-के-सब बचपन ही में मर गए। आखिरी पुत्र हेमराज उसके जीवन का सहारा था। उसका मुंह देखकर वह पहले बच्चों की मौत का ग़म भूल जाती थी। यद्यपि हेमराज का रंग-रूप साधारण दिहाती बालकों का-सा ही था, मगर लाजवंती उसे सबसे सुंदर समझती थी। मातृ-वात्सल्य ने आँखों को धोखे में डाल दिया था। लाजवंती को उसकी इतनी चिंता थी कि दिन-रात उसे छाती से लगाए फिरती थी; मानो वह कोई दीपक हो, जिसे बुझाने के लिए हवा के तेज़ झोंके बार-बार आक्रमण कर रहे हों। ✅धार्मिक व आध्यात्मिक कहानियाँ सुनने के लिए आप हमारे एक अन्य चैनल 'Spiritual Corner' पर आ सकते हैं आपका स्वागत है। channel link for Spiritual Corner link- / @spiritual-corner ✅Share, Support, and Subscribe. ✅Thank you for your support.