मार्कंडेय महादेव: ऐसा मंदिर जहां यमराज भी हुए थे पराजित यह मंदिर बनारस से करीब 30 किमी दूर गंगा-गोमती के संगम तट पर स्थित है।मार्कण्डेय महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश के धार्मिक स्थलों में से एक है।यह मंदिर वाराणसी गाजीपुर राजमार्ग पर कैथी गांव के पास है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों के समकक्ष वाले इस धाम कि चर्चा श्री मार्कंडेय पुराण में भी की गयी है। मारकण्डेय महादेव की महत्ता गंगा-गोमती के पावन तट व गर्गाचार्य ऋषि के तपोस्थली पर अवस्थित मारकण्डेय धाम आस्था का प्रतीक है। यहां प्रति वर्ष महाशिवरात्रि के अलावा सावन माह में काफी संख्या में कांवरिया बाबा का जलाभिषेक करते हैं। साथ ही भक्तगण यहां महीने में दो त्रयोदशी को भी भगवान भोलेनाथ का दर्शन पूजन कर धन्य होते हैं। कहा जाता है कि जब मारकण्डेय ऋ षि तपस्या में लीन थे तब यमराज खुद उन्हें लेने आए थे क्योंकि उनकी आयु पूरी हो चुकी थी। उस समय बालक मारकण्डेय ऋषि ने भगवान भोलेनाथ का आह्वान किया और साक्षात शिवशंकर प्रकट हुए । उन्होंने यमराज को जब मारकण्डेय जी को ले जाने से रोका तो वहीं पर दोनों में युद्ध हुआ। तत्पश्चात यमराज को पराजित होना पड़ा और वह वापस यमलोक चले गये। उस समय भगवान भोलेनाथ ने अपने परम भक्त मारकण्डेय ऋषि से कहा कि आज से जो भी श्रद्धालु या भक्त मेरे दर्शन को इस धाम में आयेगा वह पहले तुम्हारी पूजा करेगा उसके बाद मेरी। तब से यह आस्थाधाम मारकण्डेय महादेव के नाम से विख्यात हुआ। #shiv #shiva #shivmandir #shivtemples #shivtemple