कहानी का नाम: “नीलम झील का रहस्य” समय: लगभग 10 मिनट की कहानी शैली: रहस्य, थ्रिलर, जादूई ताकतें, सस्पेंस और ड्रामा भूमिका छोटे से गाँव रुद्रपुर के पास एक गहरी, शांत और नीली झील थी — नीलम झील। गाँव वालों का मानना था कि इस झील में कोई रहस्यमयी शक्ति बसी है, इसलिए कोई भी वहाँ रात को नहीं जाता था। लेकिन एक दिन एक अजनबी युवक गाँव आया, जिसकी आँखों में कुछ अलग ही चमक थी। कहानी की शुरुआत उस युवक का नाम था अर्जुन। वह पढ़ाई के लिए शहर गया था, लेकिन अचानक गाँव लौट आया। सबको लगा कि वह बस छुट्टी मनाने आया है। पर अर्जुन के इरादे कुछ और थे। अर्जुन बचपन में एक दुर्घटना में अपनी माँ को खो चुका था, और उसे हमेशा लगता था कि उसकी माँ की मौत साधारण नहीं, बल्कि किसी जादुई शक्ति का परिणाम थी। और ये रहस्य कहीं ना कहीं उसी नीलम झील से जुड़ा हुआ था। झील के पास अजीब घटनाएं एक रात अर्जुन चुपचाप झील के पास गया। हवा ठंडी थी, झील का पानी चमक रहा था, जैसे चाँदी पिघल रही हो। तभी अचानक झील के पानी से नीली रोशनी निकली और अर्जुन को अपनी ओर खींचने लगी। अर्जुन डर गया लेकिन भागा नहीं। तभी एक आवाज़ आई: “वापस मत जा अर्जुन… अब तुम सच के करीब हो।” वह आवाज़ किसी और की नहीं, बल्कि उसकी माँ की आत्मा की थी। जादुई शक्ति का सच अर्जुन को एक सपना आया जिसमें उसकी माँ ने उसे बताया कि झील में एक पुरानी रक्षक आत्मा बसी है, जो गाँव की रक्षा करती थी। लेकिन सालों पहले एक काली जादूगरनी ने उस शक्ति को कैद कर लिया था। अर्जुन की माँ उसी जादूगरनी से लड़ते हुए मारी गई थी। अब वो शक्ति अर्जुन के अंदर जागने को तैयार थी। रहस्य गहराता है अर्जुन को पता चला कि गाँव के ही एक साधारण दिखने वाले बाबा — बाबा त्रिलोचन — असल में उस जादूगरनी के सेवक हैं। वह अर्जुन को हर हाल में रोकना चाहते थे। लेकिन अर्जुन को अब अपनी माँ की विरासत पूरी करनी थी। सस्पेंस और मुकाबला एक रात अर्जुन झील पर पहुँचा, वहाँ बाबा त्रिलोचन पहले से इंतज़ार कर रहे थे। उनके साथ थे तीन अजीब प्राणी — अंधेरे से बने हुए राक्षस। अर्जुन ने अपनी माँ की दी हुई चाबी से झील के बीच में छिपे जादुई पत्थर को छुआ, और तभी एक चमत्कार हुआ। अर्जुन के शरीर से नीली रोशनी निकली, और वह हवा में उड़ने लगा। उसके हाथों में आग और पानी दोनों की शक्ति थी। एक जबरदस्त जादुई युद्ध हुआ। अर्जुन ने बाबा त्रिलोचन को हराकर झील की रक्षक शक्ति को आज़ाद कर दिया। चौंकाने वाला रहस्य जब सब खत्म हुआ, अर्जुन की माँ की आत्मा फिर प्रकट हुई और कहा: "बेटा, तू सिर्फ मेरा नहीं, उस शक्ति का वारिस है जिसे सदियों से देवता छिपाए हुए थे। अब तुझे इस गाँव की और इस शक्ति की रक्षा करनी है।” अर्जुन अब साधारण इंसान नहीं रहा। वह बना झील का रक्षक, एक ऐसा योद्धा जिसके पास जादू और न्याय दोनों की शक्ति थी। अंतिम मोड़ (Twist Ending) कुछ साल बाद, एक बच्ची उस झील के पास खेल रही थी। तभी झील से नीली रोशनी फिर निकली... पर इस बार आवाज़ आई: “अब अर्जुन नहीं… कोई और जागा है।” झील का रहस्य खत्म नहीं हुआ था… यह बस एक नई कहानी की शुरुआत थी।