#10 लाय सजीवन लखन जियाये...तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई | हनुमान चालीसा का अर्थ by Eeshaan Mahesh

#10 लाय सजीवन लखन जियाये...तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई | हनुमान चालीसा का अर्थ by Eeshaan Mahesh

रघुवंषनाथम् भाग-3 भरत की साधना Rs. 699 गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं कि लाभ-हानि, सुख-दुख, यष-अपयष ये सब विधाता के हाथ हैं। इस महावाक्य के दर्षन ‘भरत की साधना’ उपन्यास में हो रही हैं। भरत अपने ननीहाल से अयोध्या लौटते हैं और देखते हैं कि वहाँ अनहोनी घट गई है। कोई यह स्वीकार नहीं कर पर रहा है कि भरत सर्वथा निर्दोष और निष्पाप हैं। तात्कालीन परिस्थितियों में उनको श्रीराम के वनवास का दोषी मानकर, भारी कलंक झेलना पड़ा। समाज में घोर अपयष मिला। पिता का देहांत हो चुका है, माताएँ षोक से रो-रोकर बेहाल हैं। राम को चौदह वर्षों के लिए राज्य से निष्कासित कर, वनवास दे दिया गया है। अयोध्या में अराजकता की स्थिति हो गई है। अयोध्यावासी इस महान् दुर्घटना के पीछे भरत का षड्यंत्र ही देख रहे हैं और उनका सारा व्यवहार भरत को अपराधी घोषित कर रहा है। भरत को ऐसा लग रहा था कि अयोध्या का एक-एक कण उनको षड्यंत्रकारी के रूप में देख रहा है। उनके लिए अयोध्या में किसी से आँखें मिला पाना भी दुष्कर हो गया था। कोई इस बात को पचा ही नहीं पा रहा था कि भरत निष्पाप और निर्दोष है। उनको अपनी जननी कैकेयी के द्वारा दषरथ से माँगे जानेवाले वरों की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। ऐसी विकट स्थिति में भरत की कठोर परीक्षा हो रही है। उन्हें ऐसे समय में सबकुछ साधना है। यह काल उनकी साधना का प्रखर काल है। उनकी साधना अपयष के कलंक को धोकर; धर्मपूर्वक अपना कर्तव्यपालन करने की है। उनकी तपस्या में विधाता ने पग-पग पर काँटे बिछाए हुए हैं। उनके लहुलुहान पगों में वे काँटे तब तक चुभते रहते हैं, जब तक कि वे चित्रकूट में श्रीराम के श्रीचरणों में अपना षीष नहीं नवा लेते। यहाँ उनको आत्मग्लानि और अपराध-बोध से मुक्ति मिलती है और अपनी भातृभक्ति की साधना का फल प्राप्त होता है। सीता के पिता सीरध्वज, सम्राट जनक को ‘विदेह’ क्यों कहा जाता है, इसका स्पष्टीकरण यह उपन्यास सूक्ष्म तथा गहरे अर्थवाली घटनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करता है। यह उपन्यास त्याग, तपस्या और चिंतन का प्राण है। 📲📚 WhatsApp Book Store: https://wa.me/c/918130474656 ईशान ध्यान मंदिर - FREE DELIVERY 📲 Contact Eeshaan Mahesh on WhatsApp only: → 8587891910 • Click below to send WhatsApp Message to Eeshaan Mahesh https://wa.me/918587891910 Eeshaan Mahesh's Books also on Amazon: 📚📗 🌐 https://www.amazon.in/s?me=A3TMO6SQ5Q... 🌐 https://www.eeshaandhyanmandir.com 📲 https://sites.google.com/view/eeshaan... eBooks on Amazon🖥 📲 https://rb.gy/xqsxoh #10 ↓ लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। Whole Hanuman Chalisa Series ↓ #1:    • #1 हनुमान चालीसा का अर्थ | पढ़ने का सही तरी...   #2:    • #2 अहंकार छुड़वाने की विनती | हनुमान चालीसा...   #3:    • #3 जय हनुमान ज्ञान गुन सागर...जय कपीस तिहु...   #4:    • #4 रामदूत अतुलित बल धामा...अंजनि-पुत्र पवन...   #5:    • #5 महाबीर बिक्रम बजरंगी...कुमति निवार सुमत...   #6:    • #6 कंचन बरन बिराज सुबेसा....कांधे मूंज जने...   #7:    • #7 संकर सुवन केसरीनंदन...राम काज करिबे को ...   #8:    • #8 प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया...राम लखन ...   #9:    • #9 सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा...रामचंद्...   Video uploaded by: Anahat Sharma