www.khulasamedia.com पटना से अनु प्रकाश की रिपोर्ट सिवान मतलब शहाबुद्दीन ... शहाबुद्दीन मतलब ... आरजेडी ... शहाबुद्दीन मतलब बिहार ... किसी ज़माने में जिसकी तूती पुरे बिहार बोलती थी जिसके इशारे या सहमति के बिना बिहार में पत्ता नहीं हिलता था आज उस शहाबुद्दीन की मिटटी मंजिल में शामिल होने के लिए कोई राजनेता नहीं पहुंचा . जिस राज नेताओं को शहाबुद्दीन की वजह से जीत मिलती थी ...जो फर्श से अर्श तक पहुँच गए ...उन्होंने भी एक बार भी शहाबुद्दीन की मौत पर सवाल नहीं उठाये की आखिर शहाबुद्दीन को कोरोना ने संक्रमित कैसे किया ... दिल्ली के तिहार में उम्र कैद की सज़ा काट रहे शहाबुद्दीन आखिर क्यों दिन दयाल उपाध्याय अस्पताल में भारती कराये गए जबकि वे सांसद रह चुके थे वो भी एक बार नहीं ... आखिर क्यों तिहार जेल प्रशासन ने एम्स में दाखिल नहीं कराया ... यह सवाल हमारे नहीं है शहाबुद्दीन के चाह्नो वाले के हैं जो लगातार यह कह रहे हैं की जिस शख्स को कभी शुगर नहीं हुआ जिसको कभी ब्लड प्रेशर की दवा नहीं खानी पड़ी आखिर वह शख्स भले ही अपराध के लिए जेल में उम्र कैद की सज़ा काट रहा हो उसको एम्स में क्यों नहीं भर्ती कराया गया . अब तो लोग सवाल उठा रहे हैं . झारखंड तंजीम के केन्द्रीय अध्यक्ष शमशेर आलम इस मामले पर आरजेडी समेत सेक्युलर पार्टियों को दोषी करार दे रहे हैं और मामले को लेकर सड़क पर उतरने की बात कर रहे हैं वही बिहार सरकार में शामिल हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने ट्वीट कर मामले की जुडिशियल इन्क्वायरी की मांग की है तो वही दानिश रिजवान ने सीबीआई जांच की मांग की है . अब आपको बता दें की अस्सी के दशक में सीवान जिला तीन लोगों के लिए जाना जाता था. पहले देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद दुसरे सिविल सर्विसेज़ टॉपर आमिर सुभानी और तीसरा ठग नटवर लाल.पर इन तीनो के बाद एक और नाम सिवान में अपनी पहचान बनाया था जिसका नाम था -शहाबुद्दीन. जिसकी सीधी अदावत सीपीआइ माले और बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ थी . जो चन्दा बाबू और प्रतापपुर में हुए खुनी संघर्ष और हत्यों को लेकर चर्चित हुआ था. जिसे लोग शाहाबू ... साहेब या शहाबुद्दीन के नाम से जानने लगे थे . 1986 में हुसैनगंज थाने में शहाबुद्दीन पर पहला मामला दर्ज किया गया था . अस्सी के दशक में ही लालू यादव मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पक्की कर रहे थे और उस दौरान शहाबुद्दीन लालू के साथ हो लिया. मात्र 23 की उम्र में 1990 में विधायक बन गया था और लालू को विधायको की जरुरत थी . शहाबुद्दीन दो बार विधायक बना और चार बार सांसद. 1996 में केन्द्रीय राज्य मंत्री बनते-बनते रह गया था. जिस पार्टी के लिए इसने सबकुछ किया एम वे समीकरण बना उस पार्टी के एक भी नेता इसकी मौत पर आंसू बहाने तक नहीं सामने आये . बहरहाल , कोरोना काल में शहाबुद्दीन की मौत के बाद बिहार में मुस्लिम युवक सुलग रहे हैं और वे चाहते हैं की शहाबुद्दीन की मौत की असली कहानी सामने आये क्योंकि किसी को यकींन नहीं सरकारी कहानी पर . आप हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब कीजिये और देखते रहिये खुलासा. आप हमें खबर भी भेज सकते है हमारे नंबर पर. नंबर है -06127966001 Follow us on Social Network : / खुलासा https://www.khulasamedia.com / khulasamedia / khulasamedia KHULASA MEDIA HOUSE NO – AB - 47 SK PURI BOARING ROAD PATNA – 800001 CONT – 06127966001 WHATSAPP- 9430021703 ~-~~-~~~-~~-~ Please watch: "#KhulasaMedia : Mohana यानी मोहन ठाकुर को कब पुलिस करेगी गिरफ्तार" • #KhulasaMedia : Mohana thakur को कब polic... ~-~~-~~~-~~-~