इस गांव में वर्जित है हनुमान जी की पूजा | हनुमान जी की गलती की सजा आज भी यहाँ की महिलाएं भुगतती है |

इस गांव में वर्जित है हनुमान जी की पूजा | हनुमान जी की गलती की सजा आज भी यहाँ की महिलाएं भुगतती है |

इस गांव में वर्जित है हनुमान जी की पूजा | हनुमान जी की गलती की सजा आज भी यहाँ की महिलाएं भुगतती है | #DronagiriParvat #HanumanLiftedSanjeevani #Dronagiri #Village #JOSHIMATH #UTTARAKHAND #हनुमानजीकीपूजा #DronagiriVillage देवों की भूमि देव भूमि उत्तराखंड में कई लोककथाएं, कई किस्सें कहानियां मशहूर है. उत्तराखंड का हर एक गांव एक कहानी कहता् है. एक ऐसी कहानी जिससे हम और आप अनजान है. एक ऐसी ही कहानी एक ऐसी ही मान्याता है उत्तराखंड के एक गांव में, जहां अगर आप जाए तो गलती से भी भगवान हनुमान की फोटो अपने साथ ना ले जाएं क्योंकि यहां वर्जित है बजरंगबली की पूजा. जानिए हमारे साथ इस गांव के बारे मेंं.. #dronagiri #dronagiri_uttrakhand #uttrakhand_tourism हम सब जानते है हनुमान जी प्रमुख #आराध्य देवों में से एक है, और जहां-जहां भारतीय रहते हैं, वहां-वहां उनकी पूजा की जाती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते है कि हमारे ही देश में एक जगह ऐसी है जहां हनुमान जी की पूजा नहीं की जाती है, यहां तक कि वहां हनुमानजी का कोई मंदिर तक नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां के रहवासी हनुमान जी से आज तक नाराज़ हैं। यह जगह है उत्तराखंड स्थित द्रोणागिरि गांव। द्रोणागिरि गांव द्रोणागिरि गांव उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के जोशीमठ प्रखण्ड में जोशीमठ नीति मार्ग पर है। यह गांव लगभग 12000 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां के लोगों का मानना है कि हनुमानजी जिस #पर्वत को संजीवनी बूटी के लिए उठाकर ले गए थे, वह यहीं स्थित था। चूंकि द्रोणागिरि के लोग उस पर्वत की पूजा करते थे, इसलिए वे हनुमानजी द्वारा पर्वत उठाकर ले जाने से नाराज हो गए। यही कारण है कि आज भी यहां हनुमानजी की पूजा नहीं होती। यहां तक कि इस गांव में लाल रंग का झंडा लगाने पर पाबंदी है। द्रोणागिरी गाँव उत्तराखंड का ऐतिहासिक गाँव है।ये गाँव समुद्र तल से करीब 3600 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। द्रोणागिरी गाँव का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है।रामायण काल में जब युद्ध में लक्ष्मण मूर्छित हुए तो हनुमान जी ने द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लेकर आए थे।इस कारण आज भी इस गाँव के लोग हनुमान जी की पूजा नही करते। #neetivalley #chamoli #badrinath पैराणिक मान्यता है कि जब हनुमान संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे तो उन्हें कोहरे के कारण रास्ता नही दिखा।गाँव में एक बुजुर्ग महिला हनुमान जी को दिखी और उन्होंने द्रोणागिरी पर्वत का रास्ता पूछा और महिला बता दिया।महिला को हनुमान जी अपने कंधे पर बैठा कर द्रोणागिरि पर्वत के पास ले गये।जब हनुमान जी द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लेकर आये।हनुमान जब द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बूटी लेकर जा रहे थे उस समय द्रोणगिरि पर्वत की लड़ाई हुई।काफी देर तक दोनो की लड़ाई होती रही।हनुमान जी ने द्रोणागिरि पर्वत का हाथ तोड़ दिया।इस घटना के बाद द्रोणागिरि पर्वत ने महिलाओं को श्राप दिया कि जब भी मेरी पूजा होगी महिलाएं उसमे नही शामिल होंगी। द्रोणागिरी गाँव से बागनी ग्लेशियर 4 किमी की दुरी पर स्थित है।बागनी ग्लेशियर 4000मीटर की ऊँचाई पर बसा है। द्रोणागिरि गाँव चमोली जिले के जोशीमठ ब्लॉक में स्थित है।जोशीमठ से नीति घाटी में तपोवन से आगे जुम्मा गाँव से द्रोणागिरि के लिए जाना होता है।जुम्मा से 3 किमी तक सड़क रूइंग गाँव तक पहुँच गई है और रूइंग से आगे द्रोणागिरी तक सड़क निर्माणाधीन है। India's First HD Ready Spiritual Channel Follow us on: Facebook:   / santvanichannel   Follow us on: Twitter :   / santvanichannel   Follow is on Instagram:   / santvanichannel   Find us on: http://www.santvani.in​ Download App : https://vsit.click/zrc3a For more videos like this please "Subscribe" our Channel.