गैर जमानती अपराध / जमानती अपराध #Non-Bailable vs #Bailable || SDM DR NITIN SHAKYA SIR

गैर जमानती अपराध / जमानती अपराध #Non-Bailable vs #Bailable || SDM DR NITIN SHAKYA SIR

🛑जमानति अपराध VS ग़ैर ज़मानती अपराध क्या होते हैं ❓❓❓ 🛑जानिए क़ानून 🛑जमानती अपराध (Bailable) ✅भारतीय दंड संहिता की प्रथम अनुसूची में जमानतीय अपराधों का उल्लेख किया गया है। जमानती अपराधों में मारपीट, धमकी, लापरवाही से मौत, लापरवाही से गाड़ी चलाना, जैसे मामले आते हैं। ऐसे अपराधों को जमानती बताया गया है और उसमें अभियुक्त की ज़मानत स्वीकार करना पुलिस अधिकारी एवं न्यायालय का कर्त्तव्य है। ✅उदाहरण के लिये, किसी व्यक्ति को स्वेच्छापूर्वक साधारण चोट पहुँचाना, उसे सदोष रूप से अवरोधित अथवा परिरोधित करना, मानहानि करना आदि भी ज़मानती अपराध हैं। जमानती अपराध में कोर्ट को बेल देनी ही होती है| ✅सीआरपीसी की धारा 436 के तहत जमानती अपराध में कोर्ट द्वारा जमानत दे दी जाती है। 👉कुछ परिस्थितियों में सीआरपीसी की धारा 169 के तहत थाने से ही जमानत दिए जाने का भी प्रावधान है। गिरफ्तारी होने पर थाने का इंचार्ज बेल बॉन्ड भरवाने के बाद आरोपी को जमानत दे सकता है। 🛑गैर जमानती अपराध (Non-Bailable) ✅भारतीय दंड संहिता में गैर -जमानती अपराध की परिभाषा नहीं दी गयी है।सामान्यतया गंभीर प्रकृति के अपराधों को ग़ैर-ज़मानती बनाया गया है। ऐसे अपराधों में ज़मानत स्वीकार किया जाना या नहीं करना कोर्ट के विवेक पर निर्भर करता है।उदहारण के लिये, अतिचार, चोरी के लिए गृह-भेदन, मर्डर, अपराधिक न्यास भंग आदि ग़ैर-ज़मानती अपराध हैं। इनमे जमानत भारतीय दंड सहित की धारा 437 के अंतर्गत मिलती है ✅गैर जमानती अपराधों में डकैती, लूट, रेप, हत्या की कोशिश,फिरौती के लिए अपहरण और गैर इरादतन हत्या जैसे अपराध शामिल है| इस तरह के मामलों में अदालत के सामने तथ्य पेश किए जाते हैं और फिर कोर्ट जमानत पर निर्णय लेता है। गैर-जमानती अपराध करनें वाले व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना पड़ता है। ऐसे मामले में आरोपित व्यक्ति को फांसी या उम्रकैद तक की सजा हो सकती है,ऐसे में उस व्यक्ति को बेल नहीं दी जाती । ✅सेशन कोर्ट में यदि उम्रकैद या फांसी की सजा के प्रावधान वाले केस में सीआरपीसी की धारा-437 के अपवाद का सहारा लेकर जमानत अर्जी लगाई गई हो तो उस आधार पर कई बार जमानत मिल सकती है, परन्तु यह याचिका कोई महिला या शारीरिक या मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति ही लगा सकता है, लेकिन बेल देने का अंतिम निर्णय कोर्ट का ही होगा। #NonBailable vs #Bailable #law