।।आध्यात्मिक सम्वाद।। Plz subscribe this chainal श्री शिव महापुराण संक्षिप्त कथा 💐💐💐💐💐💐💐💐 विद्येश्वर संहिता अध्याय 15 • shiv puraan/विद्येश्वर संहिता/अध्याय15/देश... विद्येश्वर संहिता अध्याय 14 • shiv puraan/विद्येश्वर संहिता/अध्याय14/अग्... विद्येश्वर संहिता अध्याय 13 • shiv puraan/विद्येश्वर संहिता/अध्याय13/सदा... विद्येश्वर संहिता अध्याय 12 • shiv puraan/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 12/मो... विद्येश्वर संहिता अध्याय 11 • shiv puraan/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 11/शि... विद्येश्वर संहिता अध्याय 10 • shiv puraan/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 10/प्... विद्येश्वर संहिता अध्याय 9 • shiv puraan/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 9/शिव... विद्येश्वर संहिता अध्याय 8 • shiv puraan/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 8/भगव... विद्येश्वर संहिता अध्याय 7 • shiv puraan/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 7/भगव... विद्येश्वर संहिता अध्याय 6 • shiv puraan/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 6/ब्र... विद्येश्वर संहिता अध्याय 5 • shiv puran/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 5/शिवल... विद्येश्वर संहिता अध्याय 4 • shiv puran/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 4/सनत ... विद्येश्वर संहिता अध्याय 3 • shiv puran/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 3/श्रव... विद्येश्वर संहिता अध्याय 2 • shiv puran/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 2/शिव ... विद्येश्वर संहिता अध्याय 1 • shiv puran/विद्येश्वर संहिता/अध्याय 1/पाप ... नियमित , अध्यात्म से सम्बंधित अधिक वीडियो पाने हेतु नीचे दिए गए लिंक से जुड़ सकते है। व्हाट्सएप आध्यात्मिक सम्वाद चैनल https://chat.whatsapp.com/CcLAs68Hnau... टेलीग्राम आध्यात्मिक सम्वाद @adhyatmiksamvad ज्योतिषाचार्य वास्तुविद् अगमोक्त प्रवीण आचार्य रुद्रेश्वरन गर्ग कृपया वीडियो को अधिक से अधिक शेयर करे और नवीन दर्शक चैनल को सब्सक्राइब करें और बेल आइकॉन को भी ऑन कर ले जिससे आप को कथाए क्रामनुसार प्राप्त होते रहें। शिव पुराण' में प्रमुख रूप से शिव-भक्ति और शिव-महिमा का विस्तार से वर्णन है। लगभग सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य तथा करुणा की मूर्ति बताया गया है। शिव सहज ही प्रसन्न हो जाने वाले एवं मनोवांछित फल देने वाले हैं। 'शिव पुराण' में शिव के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके रहन-सहन, विवाह और उनके पुत्रों की उत्पत्ति के विषय में विशेष रूप से वर्णन है। भगवान शिव सदैव लोकोपकारी और हितकारी हैं। त्रिदेवों में इन्हें संहार का देवता भी माना गया है। शिवोपासना को अत्यन्त सरल माना गया है। अन्य देवताओं की भांति भगवान शिव को सुगंधित पुष्पमालाओं और मीठे पकवानों की आवश्यकता नहीं पड़ती। शिव तो स्वच्छ जल, बिल्व पत्र, कंटीले और न खाए जाने वाले पौधों के फल धूतरा आदि से ही प्रसन्न हो जाते हैं। शिव को मनोरम वेशभूषा और अलंकारों की आवश्यकता भी नहीं है। वे तो औघड़ बाबा हैं। जटाजूट धारी, गले में लिपटे नाग और रुद्राक्ष की मालाएं, शरीर पर बाघम्बर, चिता की भस्म लगाए एवं हाथ में त्रिशूल पकड़े हुए वे सारे विश्व को अपनी पद्चाप तथा डमरू की कर्णभेदी ध्वनि से नचाते रहते हैं। इसीलिए उन्हें नटराज की संज्ञा भी दी गई है। उनकी वेशभूषा से 'जीवन' और 'मृत्यु' का बोध होता है। शीश पर गंगा और चन्द्र जीवन एवं कला के प्रतीक हैं। शरीर पर चिता की भस्म मृत्यु की प्रतीक है। यह जीवन गंगा की धारा की भांति चलते हुए अन्त में मृत्यु सागर में लीन हो जाता है। 'रामचरितमानस' में शिव 'रामचरितमानस' में तुलसीदास ने जिन्हें 'अशिव वेषधारी' और 'नाना वाहन नाना भेष' वाले गणों का अधिपति कहा है, शिव जन-सुलभ तथा आडम्बर विहीन वेष को ही धारण करने वाले हैं। वे 'नीलकंठ' कहलाते हैं। क्योंकि समुद्र मंथन के समय जब देवगण एवं असुरगण अद्भुत और बहुमूल्य रत्नों को हस्तगत करने के लिए व्याकुल थे, तब कालकूट विष के बाहर निकलने से सभी पीछे हट गए। उसे ग्रहण करने के लिए कोई तैयार नहीं हुआ। तब शिव ने ही उस महाविनाशक विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। तभी से शिव नीलकंठ कहलाए। क्योंकि विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया था। ऐसे परोपकारी और अपरिग्रही शिव का चरित्र वर्णित करने के लिए ही इस पुराण की रचना की गई है। यह पुराण पूर्णत: भक्ति ग्रन्थ है। पुराणों के मान्य पांच विषयों का 'शिव पुराण' में अभाव है। इस पुराण में कलियुग के पापकर्म से ग्रसित व्यक्ति को 'मुक्ति' के लिए शिव-भक्ति का मार्ग सुझाया गया है। मनुष्य को #निष्काम भाव से अपने समस्त कर्म शिव को अर्पित कर देने चाहिए। वेदों और उपनिषदों में 'प्रणव - ॐ' के जप को मुक्ति का आधार बताया गया है। प्रणव के अतिरिक्त 'गायत्री मन्त्र' के जप को भी शान्ति और मोक्षकारक कहा गया है। परन्तु इस पुराण में आठ संहिताओं सका उल्लेख प्राप्त होता है, जो #मोक्ष कारक हैं। ये संहिताएं हैं- विद्येश्वर संहिता, रुद्र संहिता, शतरुद्र संहिता, कोटिरुद्र संहिता, उमा संहिता, कैलास संहिता, वायु संहिता (पूर्व भाग) और वायु संहिता (उत्तर भाग)। इस #विभाजन के साथ ही सर्वप्रथम 'शिव पुराण' का माहात्म्य प्रकट किया गया है। इस प्रसंग में चंचुला नामक एक पतिता स्त्री की कथा है जो 'शिव पुराण' सुनकर स्वयं सद्गति को प्राप्त हो जाती है। यही नहीं, वह अपने कुमार्गगामी पति को भी मोक्ष दिला देती है। तदुपरान्त शिव पूजा की विधि बताई गई है। शिव कथा सुनने वालों को उपवास आदि न करने के लिए कहा गया है। क्योंकि भूखे पेट कथा में मन नहीं लगता। साथ ही गरिष्ठ भोजन, बासी भोजन, वायु विकार उत्पन्न करने वाली दालें, बैंगन, मूली, प्याज, लहसुन, गाजर तथा मांस-मदिरा का सेवन वर्जित बताया गया है। ज्योतिषाचार्य वास्तुविद आगमोक्त प्रवीण आचार्य श्री रुद्रेश्वरन गर्ग।सम्पर्क सूत्र- 8317083301