कविता।अधर्म कि बड़िती चाल।धर्म व संतो पर अन्याय कि सीमा पार।kvita

कविता।अधर्म कि बड़िती चाल।धर्म व संतो पर अन्याय कि सीमा पार।kvita

धर्म व संतो पर अन्याय कि सीमा पार होती सम्भावना को दर्शाती कविता,kvita