शनिदेव चालीसा | Shani Dev Chalisa | Shani Bhajan | Shani Dev Song | Bhakti Song | शनि चालीसा 🔔 मेरे प्रिय भक्तों आप सभी से अनुरोध है कि @bhajanindia चैनल को Subscribe करें व भक्ती भजनो का आनंद ले व अन्य भक्तों के साथ SHARE करें व LIKE जरूर करें 🙏 / @bhajanindia 📱 Listen to Your Favorite Bhakti Songs, Get Full Lyrics & Meaning, Visit our Website / @bhajanindia Beautiful Shanidev Bhajans: 🙏Shani Mantra - • शनिदेव आरती | शनिदेव मन्त्र | Shani Mantra... 🙏Mangal Deep Jalaau Mein - • ॐ नमो श्री शनिदेव तेरी आरती गाऊं | Mangal ... 🙏Nilaanjana Samaabhasam - • नीलांजना समाभासं - शनिदेव मंत्र | Nilaanja... 🙏Shani Dev Bhajans - • शनिदेव जी के भजन Shani Dev Bhajans | Nonst... 🙏Hey Shanidev Tripurari - • हे शनिदेव त्रिपुरारी Hey Shanidev Tripurar... Credits: Singer : Vipin Sachdeva Lyrics : Traditional Music : Samuel Paul Music Label: Wings Music © & ℗ Wings Entertainment Ltd. Lyrics: जय गणेश गिरिजा सुवन मंगल करण कृपाल दीनन के दुख दूर करि कीजै नाथ निहाल जय जय श्री शनिदेव प्रभु सुनहु विनय महाराज करहु कृपा हे रवि तनय राखहु जनकी लाज जयति जयति शनिदेव दयाला करत सदा भक्तन प्रतिपाला चारि भुजा तनु श्याम विराजै माथे रतन मुकुट छबि साजै परम विशाल मनोहर भाला टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला कुण्डल श्रवण चमाचम चमके हिये माल मुक्तन मणि दमकै कर में गदा त्रिशूल कुठारा पल बिच करैं अरिहिं संहारा पिंगल कृष्णो छाया नन्दन यम कोणस्थ रौद्र दुख भंजन सौरी मन्द शनी दश नामा भानु पुत्र पूजहिं सब कामा जापर प्रभु प्रसन्न हवैं जाहीं रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं पर्वतहू तृण होइ निहारत तृणहू को पर्वत करि डारत राज मिलत वन रामहिं दिन्हो कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हो बनहूँ में मृग कपट दिखाई मातु जानकी गई चतुराई लखनहिं शक्ति विकल करिडारा मचिगा दल में हाहाकारा रावण की गति-मति बौराई रामचन्द्र सों बैर बढ़ाई दियो कीट करि कंचन लंका बजि बजरंग बीर की डंका नृप विक्रम पर तुहिं पगु धारा चित्र मयूर निगलि गै हारा हार नौंलखा लाग्यो चोरी हाथ पैर डरवायो तोरी भारी दशा निकृष्ट दिखायो तेलहिं घर कोल्हू चलवायो विनय राग दीपक महाँ कीन्हो तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हो हरिश्चंद्र नृप नारि बिकानी आपहुं भरें डोम घर पानी तैसे नल पर दशा सिरानी भूंजी-मीन कूद गई पानी श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई पारवती को सती कराई तनिक विलोकत ही करि रीसा नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा पाण्डव पर भै दशा तुम्हारी बची द्रौपदी होति उघारी कौरव के भी गति मति मारयो युद्ध महाभारत करि डारयो रवि कहाँ मुख महाँ धरि तत्काला लेकर कूदि परयो पाताला शेष देव-लखि विनति लाई रवि को मुख ते दियो छुड़ाई वाहन प्रभु के सात सुजाना जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना जम्बुक सिंह आदि नख धारी सो फल ज्योतिष कहत पुकारी गज वाहन लक्श्मी गृह आवैं हैं ते सुख सम्पत्ति उपजावैं गर्दभ हानि करै बहु काजा गर्दभ सिद्धकर राज समाजा जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै मृग दे कष्ट प्राण संहारै जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी चोरी आदि होए डर भारी तैसहि चारी चरण यह नामा स्वर्ण लौह चाँदि अरु तामा लौह चरण पर जब प्रभु आवैं धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं समता ताम्र रजत शुभकारी स्वर्ण सर्व सुख मंगल कारी जो यह शनि चरित्र नित गावै कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै अद्भूत नाथ दिखावैं लीला करैं शत्रु के नशि बलि ढीला जो पण्डित सुयोग्य बुलवाई विधिवत शनि ग्रह शांति कराई पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत दीप दान दै बहु सुख पावत कहत राम सुन्दर प्रभु दासा शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा पाठ शनीश्चर देव को कीन्हों विमल तय्यार करत पाठ चालीस दिन हो भवसागर पार बोलो शनि महाराज की जय #Shanichalisa #Shanibhajan #Shanidevbhajan