#IndiraGandhi http://dblive.tv/ http://www.deshbandhu.co.in/ 1917 में भारत की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जन्म हुआ था। इंदिरा गांधी 16 वर्ष तक देश की प्रधानमंत्री रहीं। इंदिरा गांधी ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई। उनके शासनकाल में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन 1975 में आपातकाल लागू करने के फैसले को लेकर इंदिरा को भारी विरोध-प्रदर्शन और तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इंदिरा गांधी का बैंकों का राष्ट्रीयकरण, बांग्लादेश को आज़ाद कराने, गरीबों के उत्थान, प्रीवीपर्स का अंत करने में अहम योगदान था। इंदिरा गांधी के जन्मदिन को भारत में 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाया जाता है। समाज में लोगों की एकता को मजबूत करने के लिए विविध विचारों, धर्मों और जीवन शैलियों के बारे में लोगों के बीच बेहतर समझ विकसित करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। 1975 में मशहूर अभिनेत्री और भारत की पहली मिस यूनीवर्स सुष्मिता सेन का जन्म हुआ था। 1994 में मिस इंडिया का ख़िताब जीतने के बाद सुष्मिता सेन को पहचान मिली। इस प्रतियोगिता की ख़ास बात यह थी कि इस खिताब के लिए उनकी टक्कर ऐश्वर्या राय के साथ थी, जिनको पछाड़ते हुए सुष्मिता ने ख़ूबसूरती का ताज हासिल किया। इस खिताब के बाद सुष्मिता ने 'मिस यूनिवर्स' का विश्व खिताब जीतकर देश का नाम रोशन किया। 1997 में महेश भट्ट की फ़िल्म 'दस्तक' से सुष्मिता सेन ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की। हालांकि यह फ़िल्म बड़े पर्दे पर नहीं चली। इनको पहली सफलता फ़िल्म 'सिर्फ तुम' के दिलबर-दिलबर गाने से मिली, जिसमें सुष्मिता की अदाओं को दर्शकों ने ख़ूब पसंद किया। डेविड धवन की फ़िल्म 'बीवी नंबर वन' सुष्मिता की पहली हिट फ़िल्म साबित हुई। ‘आंखें’, ‘समय’, ‘मैं हूं ना’, ‘बेवफ़ा’, ‘मैंने प्यार क्यों किया’ और 'चिंगारी' इनकी बेहतरीन फ़िल्में हैं। 1985 में पहली बार विश्व की दो महाशक्तियां सोवियत संघ और अमेरिका के बीच स्विट्जरलैंड शिखर वार्ता की शुरुआत हुई थी। यह बातचीत अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और सोवियत संघ के तत्कालीन राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचोव के बीच हुई थी। दोनों देश परमाणु हथियार में कटौती करने के मुद्दे पर बातचीत करना चाहते थे,लेकिन इस बातचीत के बीच अमेरिका का प्रतिरक्षा कार्यक्रम सबसे बड़ी रुकावट था। अमेरिका के मुताबिक दुनिया में शांति के लिए हथियारों की तैनाती जरूरी है। दो दिनों तक चली बैठक में कोई भी आधिकारिक जानकारी नहीं मिल पाई थी कि आख़िर दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई। ख़बरों के मुताबिक पहले दिन की बैठक में सबसे पहले गोर्बाचोव ने रीगन से कहा था कि सोवियत संघ और अमेरिका दुनिया के महान देश हैं और महाशक्तियां हैं। दोनों ही तीसरा विश्वयुद्ध शुरु कर सकते हैं और चाहे तो दुनिया में शांति लाने के लिए काम कर सकते हैं। दूसरे दिन की बैठक में दोनों नेताओं ने एक दूसरे को अपने देश आने का न्योता दिया। दूसरे दिन रीगन ने मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए, जिसमें रीगन ने गोर्बाचोव से कहा कि वह उन्हें ना बताएं कि किस तरह से देश चलाया जाए। बैठक में हथियारों की दौड़ पर भी चर्चा हुई थी। शिखर वार्ता के दौरान गोर्बाचोव एक योद्धा की तरह अपनी बातों पर टिके रहे, तो रीगन भी अपनी बातों पर तटस्थ दिखे। 1997 में मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति अनवर सादात ने इज़राइल का ऐतिहासिक दौरा किया था। सादात इज़राइल का दौरा करने वाले पहले अरब नेता थे। दुनियाभर में उनके दौरे का विरोध हो रहा था, इसलिए उनकी सुरक्षा के पुख़्ता इंतज़ाम किए गए। इज़राइल ने इसके लिए 10 हज़ार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की थी। अगले दिन यानी 20 नवंबर को सादात ने इज़राइली संसद को संबोधित किया। इज़राइली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए सादात ने कहा कि हम सच्चे दिल से आपका हमारे बीच शांति और सुरक्षा से रहने के लिए स्वागत करते हैं। उनके दौरे के बाद मिस्र और इज़राइल के बीच शांति वार्ता की शुरुआत हुई और फिर मार्च 1979 में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ, जिसे कैंप डेविड समझौता नाम दिया गया। सादात और तत्कालीन इज़राइली प्रधानमंत्री मेनाचिम बेगिन के इस क़दम ने दोनों को पश्चिमी देशों में काफ़ी लोकप्रिय बना दिया था और उन दोनों को 1978 के लिए शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाज़ा गया। 1981 में राजधानी क़ाहिरा में हो रहे एक मिलिट्री परेड के दौरान सैनिकों ने गोली मारकर अनवर सादात की हत्या कर दी थी।