आखिर क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि । क्या कारण है कि हम महाशिवरात्रि पर्व मनाते हैं

आखिर क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि । क्या कारण है कि हम महाशिवरात्रि पर्व मनाते हैं

पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का पर्व 11 मार्च को फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी की तिथि को मनाया जाएगा. इस दिन चंद्रमा मकर राशि और सूर्य कुंभ राशि में रहेंगे. महाशिवरात्रि का पर्व शिव योग में मनाया जाएगा इस साल शिवरात्रि का त्‍योहार बेहद खास योग में मनाया जा रहा है। इस दिन शिव योग लगा रहेगा और साथ ही नक्षत्र घनिष्‍ठा रहेगा और चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। इसलिए इस बार की महाशिवरात्रि बेहद खास मानी जा रही है। इस साल शिवरात्रि की पूजा संपूर्ण विधि विधान के साथ करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी पौराणिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तीन कारणों से महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, 1.माता पार्वती और भगवान शिव का विवाह फाल्गुन मास के महाशिवरात्रि के दिन ही हुआ था इस लिए इस तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती के महामिलन का उत्सव के रूप में मनाते हैं 2. सृष्टि के आरंभ काल में आज ही के दिन शिव लिंग का प्राकट्य हुआ था और ब्रम्हा जी भगवान विष्णु आज ही के दिन उनका विधि पूर्वक पूजा और अर्चना की थी इस वजह से महाशिवरात्रि का दिन विशेष हो जाता है 3. आज ही के दिन समुद्र मंथन के समय 14 रत्नों में से सबसे पहले हलाहल विष निकला जिसे भगवान शिव ने समस्त जगत की रक्षा के लिए उस विष का पान किया और इस सृष्टि को संकट से बचाया इस वजह से भी महाशिवरात्रि मनाई जाती है आइए अब जानते हैं की महाशिव रात्रि के दिन पार्थिव पूजा का महत्व क्यों है पार्थिव पूजन से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। शिवजी की अराधना के लिए पार्थिव पूजन सभी लोग कर सकते हैं, फिर चाहे वह पुरुष हो या फिर महिला। यह सभी जानते हैं कि शिव कल्याणकारी हैं। जो पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधिवत पूजन अर्चना करता है, वह दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है। शिवपुराण में लिखा है कि पार्थिव पूजन सभी दुःखों को दूर करके सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है। यदि प्रति दिन पार्थिव पूजन किया जाए तो इस लोक तथा परलोक में भी अखण्ड शिव भक्ति मिलती है