इंग्लैंड की ठंड में सुबह चार बजे नहाता था ये किसान का बेटा, ऐसे बना देश का Pm

इंग्लैंड की ठंड में सुबह चार बजे नहाता था ये किसान का बेटा, ऐसे बना देश का Pm

इंग्लैंड की ठंड में सुबह चार बजे नहाता था ये किसान का बेटा, ऐसे बना देश का PM यूं तो भारत में कई प्रधानमंत्री हुए हैं लेकिन इतिहास में कुछ ही ने अपना नाम दर्ज करवाया हैं। देश में प्रधानमंत्री को या तो उनके काम से या फिर उनसे जुड़े विवादों के कारण जाना जाता हैं। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का 26 सितंबर को बर्थडे है। इस मौके पर DainikBhaskar.com आपको बता रहा हैं उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें। इंग्लैंड़ की ठंड में सुबह चार बजे नहाना.... इकोनोमिस्ट जगदीश भगवती बताते हैं कि जब वे और उनके फ्रैंड मनमोहन केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे उस वक्त एक गरीब किसान परिवार का नौजवान सुबह चार बजे उठ कर नहाता था। भगवती बताते हैं कि उन्होंने उस वक्त कहा था कि उनके रूटीन फॉलो करने की आदत उन्हे किसी मुकाम पर जरुर ले जाएंगी और ऐसा ही हुआ। पूर्व प्रधानमंत्री का जन्म पार्टीशन के पहले पंजाब के गाह बेगल गांव 1932 में हुआ था। पार्टीशन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। डेथ ऑफ बर्थ पर मनमोहन कहते हैं 26 सितंबर इसलिए मानी जाती है क्योंकि ये डेट स्कूल के रिकार्ड में हैं। ऐसे बने देश के पीएम मनमोहन सिंह 72 साल की उम्र देश प्रधानमंत्री बने इस बीच वे कई आयोगों के अध्यक्ष रहे। उनकी शांत रहने की आदत हमेशा विरोधियों को डराकर रखती थी। डॉ मनमोहन सिंह को 22 मई 2004 को देश का प्रधानमंत्री बनाया गया। इसके पहले वे नरसिम्हा राव सरकार में 1991 में वित्तमंत्री थे । उस वक्त उनके फैसलों ने देश की अर्थव्यवस्था को आधार दिया। केम्ब्रिज से लौटने के बाद मनमोहन पंजाब यूनिवर्सिटी में पढ़ाया और उसके बाद डी. फिल करने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी गए। डेल्ही स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में पढ़ाते हुए वे वित्त मंत्रालयके सचिव बने, योजना आयोग गए। 1982 में वे रिजर्व बैंक के गर्वनर बने और योजना आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे। वीपी सिंह सरकार में वे पीएम के आर्थिक सलाहकार भी रहे। ये हैं डॉ मनमोहन सिंह के चर्चित बयान भारत के इतिहास में अगर बहुत ही कम बोलने वाला पीएम कोई हुआ है तो वो बेशक डॉ मनमोहन सिंह ही हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि शिक्षित और समझदार व्यक्ति काम के वक्त ही बोलते है। मनमोहन सिंह जब भी बोलते है वो सुर्खियां बन जाती थी। ऐसे हैं बयान... हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी, न जाने कितने सवालों की आबरू रखी। मैं किसी नियम से ऊपर नहीं हूं, अगर ऐसा है कि इस मुद्दे पर सीबीआई या कोई और मुझसे सवाल करना चाहती है तो मेरे पास छुपाने को कुछ नही हैं। मेरे दस साल का कार्यकाल इतिहासकारों के मूल्यांकन का विषय हैं। मैं एक खुली किताब हूं। राजनीति में लंबे समय तक कोई दोस्त या दुश्मन नहीं होता हैं।