यह क्षमा-प्रार्थना श्री शंकराचार्य द्वारा रचित है। सुमधुर स्वर में इसका पाठ करने से माता जगदम्बिका प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करती हैं,ऐसी मान्यता है। प्रस्तुत प्रार्थना में साधक स्वयं को एक बालक मानकर माता से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगता है। आशय यह है कि संतान भले ही कुपात्र हो जाए परन्तु एक माँ कभी कुमाता नहीं हो सकती। अपनी संतान के द्वारा असंख्य अपराध किये जाने पर भी माता सदैव उसे क्षमा कर देती है। #सप्तशतीपाठ #जयमातादी