करवा चौथ की शाम चांद की ही क्यों की जाती है पूजा, ये रहे 4 कारण

करवा चौथ की शाम चांद की ही क्यों की जाती है पूजा, ये रहे 4 कारण

8 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए सुबह से उपवास पर रहती हैं। इस दिन शाम होते ही चांद के निकलने का इंतजार करती हैं और चांद के दीदार करते हुए उनकी पूजा अर्चना करती हैं। यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है करवा चौथ में चांद के दर्शन क्यों करते है। आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण। मान्यता के अनुसार भगवान शिव के द्वारा चंद्रमा को लंबी आयु का वरदान मिला हुआ है। चांद प्रेम और प्रसिद्धि का प्रतीक होता है यही वजह है कि सुहागिन महिलाएं करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा करती हैं ताकि उनके आशीर्वाद से सारे गुण उनके पति के अन्दर आ जाए। चंद्रमा की पूजा करने के संबंध में भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करते समय मनोवैज्ञानिक कारण बताए थे कि चांद में जो काली छाया पड़ती है दरअसल वह विष है जो उनके भाई की है।समुद्र मंथन में चांद और विष दोनो निकले थे। चांद ने विष को अपने ह्रदय में स्थान दिया है जिसके कारण चांद में दाग दिखता है। यह चांद की विशेषता है जिसके कारण इनकी पूजा की जाती है। यदि किसी कारण से पति-पत्नी किसी कारण से दूर हो जाते हैं तो चंद्रमा की विष से भरी हुए किरणें उन्हें अधिक कष्ट पहुंचाती हैं। यही कारण है करवा चौथ के दिन महिलाएं पूजा करती हैं ताकि उन्हें अपनी पति से वियोग सहन न करना पड़े। शिवजी ने चंद्रमा को अपनी जटाओं में धारण किए हुए जिसके कारण से लंबी आयु का प्रतीक माना जाता है। पति की लंबी आयु की कामना के साथ करवा चौथ की शाम को चांद के दर्शन किया जाता है।