स्मारक समिति में अधिकरी और कर्मचारी के सीपीएफ का लगभग 10 करोड़ का घोटाला , 2011 से सीपीएफ का पैसा मिलता ही नहीं , स्मारक समिति के कई कर्मचारी की मौत होने के बाद भी नहीं मिला सीपीएफ का पैसा , सीपीएफ के लिए इंडिविजुअल खाते होने चाहिए फिरभी नहीं खुला खाता , 2011 से लगातार कर्मचारियों के सीपीएफ का पैसा एफडी कर दिया जाता है , कर्मचारी के वेतन विसंगति का कोई निस्तारण नहीं किया जाता है, वही शासन से सातवा वेतन बनकर आता है लेकिन कर्मचारियों को सातवा वेतन नहीं लहू किया गया , मृतक आश्रितों को आजतक नौकरी नहीं मिली , इन सभी मामलो को लेकर आज कैमचरियो ने प्रदर्शन किया। लखनऊ में गोमती नगर आंबेडकर पार्क के गेट पर कर्मचारियों द्वारा प्रदर्शन किया गया जिसमे उन्होंने वेतन विसंगति, सातवा वेतन लागू , और कर्मचारियों का सीपीएफ का पैसा और मृतक आश्रितों जैसे तमाम मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे है जिसमे कर्मचारीओ ने आरोप लगाया की उनके सीपीएफ का पैसा गायब हो गया , जिसमे १० करोड़ से भी ज्यादा की रकम है, वही कर्मचारीओ के मृतक के बाद भी आजतक किसी को नौकरी नहीं मिली, शासन से सातवा वेतन आ जाता है लेकिन कर्मचारीओ को पुराना वेतन ही दिया जाता। सीपीएफ का 10 करोड़ से भी ज्यादा की रकम गायब है जबकि 5300 लगभग अधिकारी और कर्मचारी है उनके वेतन से प्रतिमाह पैसा कट जाता है और यह सभी पैसा फिक्स डिपॉजिट में चला जाता है , कर्मचारी के मरने के बाद भी सीपीएफ का पैसा नहीं मिलता है, रिटायर होने के बाद नहीं मिलता , तो आखिरकार वेतन से जो पैसा कटता है वह कहा जाता है। फाइनेंस मैनेजर देवेंद्र मणि उपाध्याय को मिलीभगत से सीपीएफ का 10 करोड़ का घोटाला दसो सालो से हो रहा है पैसो का इंट्रेस्ट भी खुद ही खा रहे है , सबका सिंगल खता नहीं खुलवा रहे है आखिरकार ऐसे भ्रस्ट अधिकारी पर कब कार्यवाही की जाएगी बड़ा सवाल है।