#करवा चौथ के दिन सुहागन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी आयु की कामना करती हैं#youtubeshort

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करवा चौथ के दिन इस मुहूर्त में करें सरगी, अखंड सौभाग्य की होगी प्राप्ति सुहागिन महिलाओं और अविवाहित लड़कियों के लिए करवा चौथ के पर्व का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के पुण्य प्रताप से विवाहित महिलाओं को अखंड सुहाग की प्राप्ति होती है और पति की लंबी आयु होती है। इस दिन सरगी की परंपरा को निभाया जाता है। सरगी सास अपनी बहु को देती है। करवा चौथ का पर्व कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाता है। इस त्योहार का सुहागिन महिलाओं और अविवाहित लड़कियों को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस व्रत को निर्जला किया जाता है। रात को चंद्र दर्शन करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। इस व्रत की शुरुआत सुबह सरगी से होती है। व्रत में सरगी का विशेष महत्व है। आइए इस लेख में हम आपको बताएंगे कि सरगी में किन चीजों को शामिल करना चाहिए और साथ ही जानेंगे कि इसके सेवन के शुभ मुहूर्त के बारे में। करवा चौथ व्रत को बेहद ही शुभ माना गया है। इस बार यह 20 अक्टूबर, 2024 दिन रविवार को मनाया जाएगा। यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए बहुत महत्व रखता है, खासकर जो शादी के बाद पहली बार इसे रख रही हैं। यह व्रत पूरे दिन बिना पानी के रहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत सुबह सूर्योदय से पहले सरगी के सेवन के साथ शुरू होता है और रात में चंद्रमा को देखने और उसे अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है। लेवल के अनुसार, महिलाएं अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं, तो आइए जानते हैं कि सरगी कब है करवा चौथ ? चतुर्थी तिथि का प्रारंभ - 20 अक्टूबर, सुबह रविवार 6 बजकर 46 मिनट से चतुर्थी तिथि का समापन - 21 अक्टूबर, सोमवार सुबह 4 बजकर 18 मिनट तक करवा चौथ का पर्व इसलिए 20 अक्टूबर 2024 दिन रविवार को मनाया जाएगा। करवा चौथा मुहूर्त करवा चौथ की पूजा का मुहूर्त शाम 5 बजकर 46 मिनट से 7 बजकर 2 मिनट तक है। इसके लिए आपको केवल 1 घंटा 16 मिनट का समय मिलेगा। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का पर्व मनाया जाता है, इस बार यह शुभ तिथि 20 अक्टूबर दिन रविवार को है। करवा चौथ के दिन सुहागन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करके भगवान शिव, माता पार्वती, करवा माता, भगवान गणेश और चंद्रमा चंद्र देव का पूजन किया जाता है। इस दिन महिलाएं करवा चौथ के व्रत के सभी नियमों का पालन करती हैं और करवा माता से पति और परिवार की खुशी व तरक्की की कामना करती हैं व्रत के इन 6 विशेष नियमों के बिना अधूरा रह जाता है व्रत, अखंड सौभाग्य के लिए हर सुहागिन को करना चाहिए इनका पालन करवाचौथ 20 अक्टूबर, रविवार को है। करवाचौथ व्रत रखने की कई परम्पराएं और रीति-रिवाज हैं लेकिन करवाचौथ व्रत के कुछ ऐसे विशेष नियम हैं, जिन्हें करवाचौथ का व्रत रखने वाली हर सुहागिन स्त्री को मानना चाहिए। आइए, जानते हैं करवाचौथ व्रत के 6 विशेष नियम। करवाचौथ का त्योहार इस साल 20 अक्टूबर, रविवार को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार करवाचौथ का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। करवाचौथ पर सुहागिनें अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और विधि-विधान के साथ पूजा करके अपने विवाहित जीवन की खुशहाली के लिए प्रार्थना करती हैं। विभिन्नताओं से भरे इस देश में करवाचौथ व्रत मनाने के कई तरीके हैं। सभी लोग अपनी-अपनी परम्पराओं का निर्वाह करते हुए करवाचौथ के विभिन्न रीति-रिवाज और नियमों का अनुसरण करते हैं लेकिन करवाचौथ के कुछ विशेष नियम ऐसे है, जिन्हें हर व्रती महिलाओं को मानना चाहिए। आइए, जानते हैं करवाचौथ के व्रत के नियम। निर्जला व्रत रखा जाता है करवाचौथ का व्रत करवाचौथ व्रत में कई जगह सरगी का रिवाज है। सरगी सास बहुओं को देती है जिसमें मेवे, फल, मिठाई, और श्रृंगार वग सामान शामिल होता है। इसे सूर्योदय से पहले खाना होता है। इसके बाद रात्रि तक चंद्रदेव को अर्घ्य देने तक निर्जला व्रत का पालन करना होता है। अगर किसी महिला के परिवार में सरगी की परम्परा नहीं है, तो भी कर कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि लगने के बाद कुछ खाने या पीने से परहेज करते हुए निर्जला व्रत का पालन करें। आप अपनी पसंद के अनुसार किसी भी रंग के कपड़े पहन सकते हैं और श्रृंगार कर सकते हैं लेकिन करवाचौथ पर विवाहि महिलाओं को श्रृंगार की 6 चीजों को धारण जरूर करना चाहिए। ये 6 श्रृंगार हैं-मेहंदी, सिंदूर, मंगलसू चूड़ियां, बिंदी और बिछिया (toe ring)। करवाचौथ के दिन इन चीजों को धारण करके विधि-विधान के साथ करवा माता की पूजा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और वैवाहिक जीवन खुशहाल बनता है। करवाचौथ का सबसे जरूरी और विशेष करवाचौथ पर चांद देखकर ही खोलें व्रत नियम है कि विधि-विधान के साथ पूजा करने के बाद रात्रि में चंद्रदेव की पूजा और उन्हें अर्घ्य जरूर दें। साथ ही करवाचौथ की कथा सुनने के साथ ही भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय, गणेश जी की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। इससे आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और आप जीवन में तरक्की करते हैं। मिट्टी के करवे से देना चाहिए चंद्रदेव को अर्घ्य करवाचौथ के त्योहार में यह नियम भी विशेष है। करवाचौथ पर व्रती महिलाओं को चंद्रमा को मिट्टी के करवे से ही अर्घ्य देना चाहिए। मिट्टी का करवा शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि मिट्टी का करवा धरती तत्व का प्रतीक है। इस कारण से मिट्टी का करवा अर्घ्य देने के लिए विशेष माना जाता है। करवाचौथ की विधि-विधान के साथ पूजा करके दान जरूर करें करवाचौथ पर विधि-विधान के साथ पूजा करके दान को भी बहुत ही आवश्यक माना गया है। करवाचौथ का व्रत रखने वाली महिलाएं एक थाली में श्रृंगार का सामान चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, शीशा, कंघी, रिबन और शगुन आदि अपनी विवाहित सास, जेठानी या फिर विवाहित वरिष्ठ महिला को दें सकती हैं। पूर्व मुखी होकर करें करवाचौथ