नाना रे भाँती नचायौ,भक्तन ने मोकू नाना रे, भांति नचायौ , लोकलाज तजि इनही काज मैंने बैकुंठ बिसरायौ।

नाना रे भाँती नचायौ,भक्तन ने मोकू नाना रे, भांति नचायौ , लोकलाज तजि इनही काज मैंने बैकुंठ बिसरायौ।

प्रबल प्रेम के पाले पड़कर प्रभु ने नियम बदलते रेखा । प्रभु का मान टलेटलजाए, भक्त का मान न टलते देखा । जय श्री कृष्णा जय श्री राधे जय गिरिराज जी की 🙏🙏🙏