बहोत सारे लोगों का कहना है के अमित शाह और मोदी जिस कदर नित नए कानूनों को मंजूरी दे रहे है कुछ नहीं होनेवाला पर पर मौजूदा हुकूमत की जानिब से जिस कदर अकलियती मआशरे को निशाना बनाया जा रहा है कई सारे इल्मी दानिश्वर फ़िक्र में मुब्तला है बड़े अफ़सोस के साथ यह कहना पड़ रहा है दिनी रहनुमा तक समझ नहीं पा रहे के आखिर जिस कदर सिर्फ मख़सूस मुस्लिम मशरे को निशाना बनाया जा रहा है इसका हल क्या है कहा तो यह भी जा रहा है के आज के हालात पर मुस्लिम मआशरे के रहनुमाओं ने कभी संजीदगी से बैठ कर सोचा ही नहीं हमारे पास मसलकी इख़्तेलाफ़ से फुर्सत ही कहा थी और पिछले सत्तर सालों में यही किया गया है कभी हमने मिल्लत को एक जिस्म की तरह समझा ही नहीं जब भी वक़्त मिला एक दूसरे को जहन्नमी साबित करते रहे एक दूसरे को भला बुरा कहने से हम कभी बाज़ नहीं आये फिर एक दूसरे के खिलाफ फतवे देना गोया हमारा मश्ग़ला बन गया था अफ़सोस की इंतहा यह है के एखाद मुजाहरा कर के अपनी ज़िम्मेदारी से फारिग हो जाते है आज भी आनेवाले हालात पर हम सर जोड़ कर बैठने के लिए तैयार नहीं है मौजूदा हालात पर मस्जिदों में कभी बात ही नहीं हुयी आज भी मशअरे के बड़े तबके को यह मालूम ही नहीं के आनेवाली मुसीबत क्या पैगाम लेकर आनेवाली है आज यह सवाल करने को दिल करता है के आखिर सत्तर सालों से हालात ए हाजिरा पर बयानात क्यों नहीं किये गए कभी कभी सोसिअल मीडिया पर एखाद तस्वीर ऐसी भी देखि जाती है जिसमे सेंकडो सवालों के जवाबात रहते है