संतोषी माता की व्रत कथा #santoshimaa #santoshivratkatha #sanatandharma #santosi #santosimaa #katha संतोषी व्रत, जिसे शुक्रवार का व्रत भी कहा जाता है, मां संतोषी को समर्पित एक लोकप्रिय हिंदू व्रत है। यह व्रत सुख, शांति, समृद्धि और संतोष की प्राप्ति के लिए किया जाता है। 16 शुक्रवार तक लगातार इस व्रत का पालन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ऐसा माना जाता है। संतोषी व्रत की पूजा विधि: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा के लिए एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां संतोषी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। कलश स्थापना करें और विधिवत तरीके से मां संतोषी की पूजा करें। मां को फूल, माला, सिंदूर, अक्षत आदि चढ़ाएं। भोग में गुड़ और चना, केला, या अन्य फल चढ़ाएं। घी का दीपक जलाएं और आरती करें। संतोषी माता की व्रत कथा, चालीसा, या मंत्र का पाठ करें। प्रसाद सभी को वितरित करें और कलश के जल को पूरे घर में छिड़कें। व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें: खट्टी चीजें न खाएं: व्रत के दौरान खट्टी चीजों का सेवन न करें, खासकर भोजन में। क्रोध न करें: किसी से भी वाद-विवाद या झगड़ा न करें। दान करें: गरीबों को दान करना शुभ माना जाता है। शाम को एक समय भोजन करें: शाम को मीठा भोजन या फलाहार कर सकते हैं। व्रत का उद्यापन: 16 शुक्रवार पूरे होने पर उद्यापन करें, जिसमें हवन, भंडारा आदि किया जाता है। महत्वपूर्ण: संतोषी माता को कमल का फूल अति प्रिय है, इसलिए कमल के फूल से पूजा करना शुभ माना जाता है। संतोषी माता को भगवान गणेश की पुत्री माना जाता है। यह व्रत विवाहित महिलाओं के लिए विशेष रूप से फलदायी माना जाता है, क्योंकि यह वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति और पारिवारिक समृद्धि में वृद्धि करता है। #katha #kahani #upay #sanatandharma #santoshimaa