जय जय हे!भगवति सुर भारति- सरस्वती वंदना/ कवि-डॉ. हरिरामआचार्य#saraswatipuja  #ratiramchandraker

जय जय हे!भगवति सुर भारति- सरस्वती वंदना/ कवि-डॉ. हरिरामआचार्य#saraswatipuja #ratiramchandraker

जय जय हे!भगवति सुर भारति- सरस्वती वंदना/ कवि-डॉ. हरिरामआचार्य।श्री रती राम चन्द्राकर। प्रिय मित्रों, नमस्कार ! यह सरस्वती वंदना/ "जय जय हे!भगवति सुर भारति" JAY JAY HE! BHAGWATI  SUR BHARTI" कवि-डॉ. हरिराम आचार्य। वंदना गायन में आपका सविनय सदैव स्वागत है। इस वीडियो से  कविता को लय पूर्वक, रूचिकर,  रीति से शाला में कविता गायन प्रस्तुतिकरण करने, सीखने में ,अभ्यास करने में मदद मिलेगा ।इससे दैनिक व्यवहारिक शालेय जीवन  में गीत- गायन की  समझ बढ़ाने में मदद मिलेगा। भगवती माँ सरस्वती देवी! आपको ज्ञान और बुद्धि दे!💐 धन्यवाद, वीडियो देखने के लिए। #जयजयहेभगवतिसुरभारति #ratiramchandraker #gunderdehi #balod #JAYJAYHEBHAGWATISUR BHARTI #cgschool #नवाचार #tlm #meditation #सरस्वतीवंदना #सरस्वतीपूजा #भजनगीत #संस्कृत #पढ़ाईतुहरद्वार #भजनगीत सम्पूर्ण सरस्वती वंदना जय जय हे, भगवति सुर भारति, जय जय हे, भगवती सुर भारति! तव चरणौं प्रणमामः। नाद ब्रह्ममयि, जय वागेश्वरि ! शरणम ते गच्छामः।।1।। जय जय हे...... त्वमसि शरण्या, त्रिभुवन धन्या, सुर-मुनि- वंदित- चरणा। नवरस-मधुरा, कविता-मुखरा स्मित-रुचि-रुचिरा भरणा।।2।। जय जय हे...... आसीना भव मानस-हंसे, कुन्द तुहिन-शशि-धवले! हर जड़तां कुरू बुद्धि विकासं सित-पंकज-तनु-विमले।।3।। जय जय हे...... ललित-कलामयि ज्ञान-विभामयि, वीणा-पुस्तक-धारिणी! मतिरास्ताम नो तव पदकमले, अयि कुण्ठा विष-हारिणी।।4।। जय जय हे......        कवि - डाँ.हरिराम आचार्य हिंदी अनुवाद--- 1*  हे माँ सरस्वती देवी !आप की सदा जय हो ! हम आपके चरणों में प्रणाम करते हैं। हे शब्द-ब्रह्म वाणी की स्वामिनी हम आपकी शरण में जाते हैं। 2* (हे देवी!) आप आश्रय प्रदान करने वाली ,तीनों लोकों में श्रेष्ठ, देवों और मुनियों द्वारा जिसके चरणों की वंदना की जाती है, श्रृंगार आदि नौ काव्य रसों से माधुर्यमयी, कविता के माध्यम से व्यक्त होने वाली ,मधुर मुस्काने वाली तथा सुंदर आभूषणों से युक्त हो। 3* (हे देवी!) चमेली, बर्फ और चंद्रमा के समान शुभ्र, श्वेत कमल के समान निर्मल शरीर वाली, आप मानसरोवर के राजहंस पर अर्थात मेरे हृदय रूपी हंस पर विराजें, मूर्खता को हरें।तथा ज्ञान का विकास करें। 4*( हे देवी!) ललित कलाओं से युक्त, ज्ञान की कांति से युक्त, वीणा तथा पुस्तक धारण करने वाली, हे कुंठा रूपी जहर को दूर करने वाली, मेरी बुद्धि सदैव आपके चरण कमल में लगी रहे।💐👏 प्रेषक, रती राम चन्द्राकर शिक्षक Welcome! My Educational Help Videos..    • Educational Gyaan