#indusvalleycivilization #ancienthistory #ancientindia सिंधु लिपि का रहस्य अब सुलझ गया है। जानिए कैसे यज्ञदेवम् ने AI, cryptogram और व्याकरण से इसे डिकोड किया। कई सदियों से एक सवाल भारतीय इतिहास में गूंज रहा था—क्या सिंधु घाटी सभ्यता और वैदिक सभ्यता एक ही हैं या अलग-अलग? सिंधु लिपि को कोई पढ़ नहीं पा रहा था। यह एक गूढ़, अविज्ञात रहस्य बन गई थी। लेकिन अब, यज्ञ देवम जी ने उस लिपि को डिकोड कर दिया है। उनका यह कार्य भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी खोजों में से एक है। 🧠 विज्ञान बनाम मानविकी: अलग नजरिया, अलग दृष्टिकोण यज्ञ देवम जी ने समझाया कि विज्ञान और मानविकी का दृष्टिकोण अलग होता है। विज्ञान: जो दो लोग किसी विषय पर चर्चा करें, वे एक समान निष्कर्ष तक पहुँचें—यह विज्ञान का लक्ष्य है। मानविकी: यहाँ व्याख्या का स्थान होता है। एक ही मूर्ति या शिलालेख पर कई तरह की कहानियाँ बन सकती हैं। उदाहरण: कोई राजा 5 साल तक शासन करता था, लेकिन अगर नया अभिलेख 25 साल बताता है, तो मानना होगा कि पुराना अनुमान गलत था। लेकिन कई बार अकादमिक प्रतिष्ठा के कारण पुराने विचार छोड़ना कठिन हो जाता है। 🧾 सिंधु लिपि को कैसे समझा गया? बाकी विद्वानों ने सिंधु लिपि को लोगोग्राफिक मान लिया था (जैसे चीनी भाषा)। लेकिन यज्ञ देवम जी ने बताया कि सिंधु लिपि में चिन्ह बहुत दोहराए जाते हैं, जो उसे सिलेबिक (उच्चारण आधारित) बनाता है। 🔑 उन्होंने जो तरीका अपनाया: कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और AI का प्रयोग किया प्राचीन डिक्शनरी का सहारा लिया (Monier-Williams Sanskrit Dictionary) संस्कृत के व्याकरण के नियम लगाए बार-बार प्रयोग करके जो गलतियाँ हुईं उन्हें खुद से सुधारा “यह काम बिना कंप्यूटर के संभव नहीं था। अगर मैन्युअली करते तो दशकों लग जाते।” 🕉️ संस्कृत की पुष्टि और मंत्रों की पहचान डिकोडिंग के बाद यह स्पष्ट हुआ कि सिंधु लिपि संस्कृत व्याकरण पर आधारित है और उसमें कई वैदिक मंत्र हैं। कई शिव से जुड़े नाम मिले जैसे रवा, अश्रुधा, जया, वम्र ऋषियों और वेद शाखाओं के नाम भी मिले यह सिद्ध हुआ कि यह भाषा भारतीय ही है, बाहर से आई नहीं है “ये 100% व्याकरणबद्ध संस्कृत है।” ❌ आर्यन इनवेजन थ्योरी का खंडन इस शोध से यह साफ हो गया कि आर्य भारत के बाहर से नहीं आए। उनके अपने ग्रंथों, भाषा और परंपराओं की धीरे-धीरे विकास की प्रक्रिया हज़ारों साल पुरानी है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, उपनिषद—सबमें भाषा में क्रमिक परिवर्तन दिखाई देता है, जो केवल लंबे समय में संभव है जो भी संस्कृति सिंधु घाटी में थी, वही आगे चलकर वैदिक संस्कृति बनी 🏺 सिंधु घाटी और महाभारत: एक गहरा संबंध सीलों (seals) पर ऐसी कथाएँ भी मिली हैं जो महाभारत से मेल खाती हैं: सुंडा और उपसुंडा की कहानी पशुपति सील में शिवजी के विभिन्न पशु रूप (महिषा, व्याल, शार्दूल आदि) जयद्रथ नाम और उसका प्रतीक चिन्ह (यूनिकॉर्न) भी मिला “महाभारत की कथाएँ उस दौर में प्रचलित थीं, जब सिंधु घाटी सभ्यता फल-फूल रही थी।” 🕉️ प्रतीकों की निरंतरता: स्वस्तिक से धर्मचक्र तक यज्ञ देवम जी ने बताया कि कई प्रतीक जो आज भारत की पहचान हैं, वे सिंधु सभ्यता से ही चले आ रहे हैं: स्वस्तिक, अलग-अलग डिज़ाइनों में धर्मचक्र, जिसे आज भारतीय राज्य चिह्न में भी देखा जा सकता है कृष्ण मृग, आर्य पहचान का प्रतीक बर्तन, गहने, साड़ी के डिज़ाइन, कृषि उपकरण—सब कुछ आज भी दिखता है 🧱 सिंधु नहीं, “मेलुहा” और “मेरु” हो सकता है नाम सुमेरियन सभ्यता में इस क्षेत्र को मेलुहा कहा गया है। लिपि में "मे-लु" जैसे चिन्ह मिले हैं, जिससे इसे मेलुहा या मेरु कहा जा सकता है। 🌾 सिंधु सभ्यता आज भी ज़िंदा है आखिरी में यज्ञ देवम जी ने कहा: “हमें कोई नया ग्राम नहीं बनाना पड़ेगा, सिंधु सभ्यता आज भी जीवित है—बस हमें उसे पहचानना है।” #sindhughatisabhyata #indusvalleycivilization #mahabharat #ancientindia