सूर्यनमस्कार (Surya Namaskar) के लाभ और करने की विधि

सूर्यनमस्कार (Surya Namaskar) के लाभ और करने की विधि

सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar)* एक प्राचीन योग अभ्यास है जिसमें 12 योगासन होते हैं, जो क्रमबद्ध रूप से किए जाते हैं। यह शरीर, मन और आत्मा के संतुलन के लिए अत्यंत लाभकारी है। 🌞 सूर्य नमस्कार के 12 मंत्र (Surya Namaskar Mantra) हर एक आसन के साथ एक विशेष मंत्र बोला जाता है, ये सूर्य देव के 12 नाम हैं: 1. ॐ मित्राय नमः – (Mitráya Namah) 2. ॐ रवये नमः – (Raváye Namah) 3. ॐ सूर्याय नमः – (Sūryāya Namah) 4. ॐ भानवे नमः – (Bhānavé Namah) 5. ॐ खगाय नमः – (Khagāya Namah) 6. ॐ पुष्णे नमः – (Pushné Namah) 7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः – (Hiranyagarbhāya Namah) 8. ॐ मरीचये नमः – (Marīchayé Namah) 9. ॐ आदित्याय नमः – (Ādityāya Namah) 10. ॐ सवित्रे नमः – (Savitré Namah) 11. ॐ अर्काय नमः – (Arkāya Namah) 12. ॐ भास्कराय नमः – (Bhāskarāya Namah) प्रत्येक आसन के साथ एक-एक मंत्र बोलें। इससे मन एकाग्र होता है और अभ्यास में भक्ति व ऊर्जा आती है। सूर्य नमस्कार की विधि (Step-by-step Process) 1. प्रणामासन (Pranamasana) – समस्थिति में खड़े होकर नमस्कार मुद्रा बनाएं। 2. हस्त उत्तानासन (Hastauttanasana) – हाथ ऊपर लेकर पीछे की ओर झुकें। 3. पादहस्तासन (Padahastasana) – आगे झुककर हाथ पैरों के पास रखें। 4. अश्व संचालनासन (Ashwa Sanchalanasana) – दायां पैर पीछे ले जाकर घुटना नीचे रखें। 5. पर्वत आसान या दंडासन (Dandasana) – दूसरा पैर पीछे लेकर पुश-अप जैसी स्थिति बनाएं। 6. अष्टांग नमस्कार (Ashtanga Namaskara) – शरीर के 8 भाग जमीन पर रखें। 7. भुजंगासन (Bhujangasana) – साँप की तरह छाती ऊपर उठाएं। 8. पर्वतासन (Parvatasana) – शरीर को उल्टे V आकार में लाएं। 9. अश्व संचालनासन (Ashwa Sanchalanasana) – बायां पैर आगे लाएं। 10. पादहस्तासन (Padahastasana) – दोनों पैरों को पास लाएं और झुकें। 11. हस्त उत्तानासन (Hastauttanasana) – ऊपर उठें और पीछे झुकें। 12. प्रणामासन (Pranamasana) – नमस्कार मुद्रा में आ जाएं। 👉 यह एक चक्र (Round) होता है। दोनों पैरों से बारी-बारी करने के लिए 2 चक्र = 1 पूर्ण सूर्य नमस्कार माना जाता है। सूर्य नमस्कार के 10 मुख्य लाभ (Top 10 Benefits) 1. संपूर्ण शरीर का व्यायाम – शरीर के हर अंग पर असर डालता है। 2. मांसपेशियों को टोन करता है – खासकर पेट, हाथ, जांघ और पीठ। 3. वजन कम करने में सहायक – फैट बर्न करता है। 4. पाचन क्रिया में सुधार – कब्ज, गैस और अपच में फायदेमंद। 5. रक्त संचार बेहतर करता है – त्वचा में निखार आता है। 6. मन की शांति और एकाग्रता – मानसिक तनाव कम करता है। 7. पीठ दर्द और रीढ़ की लचीलापन बढ़ता है 8. हॉर्मोन बैलेंस करता है – थायरॉयड और प्रजनन प्रणाली के लिए लाभकारी। 9. श्वसन क्षमता बढ़ाता है – फेफड़ों को मजबूत करता है। 10. चमकदार त्वचा और बेहतर नींद – आंतरिक शुद्धि के कारण। सावधानियां (Precautions) 1. खाली पेट करें – सूर्य नमस्कार करने से 3-4 घंटे पहले कुछ न खाएं। 2. धीरे-धीरे शुरू करें – शुरुआत में 3-5 चक्र से शुरू करें। 3. सांसों पर ध्यान दें – हर आसन के साथ साँस लेने-छोड़ने की प्रक्रिया फॉलो करें। 4. मासिक धर्म में महिलाएं ना करें (विशेषकर अगर कमजोरी महसूस हो)। 5. गर्भवती महिलाएं ना करे 6. हाई ब्लड प्रेशर, हर्निया, या रीढ़ की समस्याओं में सावधानी बरतें। 7. जल्दी-जल्दी न करें – गति और सांस का तालमेल ज़रूरी है। 8. ध्यानपूर्वक करें – मन को केंद्रित रखें। 9. धूप में करें तो बेहतर – सुबह के समय धूप में करना उत्तम है। 🙏 सादर 🙏 परमेश्वर दयाल कुमार जबलपुर