क्यों मारना चाहते थे हनुमान जी कर्ण को ? भगवान कृष्ण ने क्यों बचाई कर्ण की जान ?

क्यों मारना चाहते थे हनुमान जी कर्ण को ? भगवान कृष्ण ने क्यों बचाई कर्ण की जान ?

श्रीमहाभारत के युद्ध में आखिर क्‍यों भगवान कृष्‍ण को बचानी पड़ी कर्ण की जान महाभारत के युद्ध में जब कृष्ण ने 'हनुमान जी' के क्रोध को किया शांत भगवान कृष्ण ने क्यों बचाई हनुमान जी से कर्ण की जान श्री कृष्ण लीला #जबभगवानकृष्णनेकर्णकोबचायाहनुमानजीसे #हनुमानजीसेयहसबदेखानगया #हनुमानजीकोअर्जुनकेरथसेक्योंजानापड़ा #क्योंमारनाचाहतेथेहनुमानजीकर्णको हनुमानजी को अर्जुन के रथ से क्यों जाना पड़ा #महाभारतकेयुद्धमेंश्रीकृष्णनेबचाईथीकर्णकीजान कर्ण का मृत्यु संबंधी प्रसंग है कर्ण की मृत्यु के बाद क्या होता है माता कुंती ने कर्ण को किसके साथ मिलकर लड़ने को कहा था महाभारत के युद्ध में अर्जुन के रथ पर बैठे हनुमानजी कभी-कभी खड़े होकर कौरवों की सेना की और घूर कर देखते थे तो उस समय कौरवों की सेना तूफान की गति से युद्ध भूमि को छोड़ कर भाग जाती थी। हनुमानजी की दृष्टि का सामना करने का साहस किसी में नहीं था। यहां तक कि उनकी दृष्टि एक बार कौरवों की ओर से लड़ रहे कर्ण पर भी पड़ गई थी। वो तो भगवान श्री कृष्‍ण थे जो कर्ण को बचा लिया, वरना वह कबके खत्‍म हो जाते। जब कर्ण और अर्जुन के बीच युद्ध चल रहा था। कर्ण अर्जुन पर भयंकर वाणों की वर्षा कर रहे थे। उनके बाणों की वर्षा से श्रीकृष्ण को भी बाण लग रहे थे। उनके बाण से श्रीकृष्ण का कवच कटकर गिर पड़ा और उनके सुकुमार अंगों पर बाण लगने लगे। हनुमानजी से यह सब देखा न गया रथ की छत पर बैठे पवनपुत्र हनुमानजी एक टक नीचे अपने आराध्य की ओर ही देख रहे थे। श्रीकृष्ण कवचहीन हो गए थे, कर्ण के बाण उनके अंगों को भेद रहे थे। हनुमानजी से यह सहन नहीं हुआ। अकस्मात वह गर्जना करके दोनों हाथ उठाकर कर्ण को मार देने के लिए उठ खड़े हुए। हनुमानजी की भयंकर गर्जना से ऐसा लगा मानो ब्रह्माण्ड फट गया हो। कौरव सेना तो पहले ही भाग चुकी थी अब पांडव पक्ष की सेना भी उनकी गर्जना के भय से भागने लगी। कर्ण के हाथ से छूटा धनुष हनुमानजी का क्रोध देखकर कर्ण के हाथ से धनुष छूट कर गिर गया। भगवान श्रीकृष्ण ने तत्काल उठकर अपना दांया हाथ उठाया और हनुमानजी को स्पर्श करके सावधान किया। बोले! तुम्हारे क्रोध करने का समय नहीं है। श्रीकृष्णके स्पर्श से हनुमानजी रुक तो गए किन्तु उनकी पूंछ खड़ी हो कर आकाश में हिल रही थी। उनके दोनों हाथों की मुट्ठी बंद थीं। उनकी आंखों में मानो आग भरी हो। श्रीकृष्‍ण ने किया हनुमानजी को शांत हनुमानजी का क्रोध देखकर कर्ण और उनके सारथी कांपने लगे। हनुमानजी का क्रोध शांत न होते देखकर श्रीकृष्ण ने कड़े स्वर में कहा हनुमान! मेरी और देखो, अगर तुम इस प्रकार कर्ण की ओर कुछ क्षण और देखोगे तो कर्ण तुम्हारी दृष्टि से ही मर जाएगा। यह त्रेतायुग नहीं है। तुम्हारे पराक्रम को तो दूर तुम्हारे तेज को भी कोई यहां सह नहीं सकता। तुमको मैंने इस युद्ध में शांत रहकर बैठने को कहा है। फिर हनुमानजी ने अपने आराध्यदेव की ओर नीचे देखा और शांत होकर बैठ गए। श्री कृष्ण ने कर्ण से क्या कहा? मरते समय कर्ण ने भगवान कृष्ण से क्या माँगा? कर्ण पिछले जन्म में क्या था?