Delhi chief minister Arvind Kejriwal-led Aam Aadmi Party (AAP) registered an emphatic win in the recently-concluded Delhi assembly election.AAP won 62 of the 70 seats because of several factors which included Kejriwal’s model of development (free or subsidised electricity, water, health, education and commuting) and his image makeover.However, Arvind Kejriwal also won because he took a cue from Prime Minister Narendra Modi’s politics to defeat the latter’s party - BJP.Kejriwal has deftly used the personal attacks on him to his advantage just as PM Modi has been doing ever since he became Gujarat chief minister For instance, when Congress leader called Narendra Modi a “chaiwala” ahead of the 2014 Lok Sabha election, the comment was used to launch a series of nationwide programmes called ‘Chai pe charcha’.Also, when former Congress president Rahul Gandhi attacked PM Modi with “Chowkidar chor hai’ jibe ahead of the 2019 Lok Sabha election, the latter prefixed his name on his Twitter handle with ‘Chowkidar’. He was followed by most of the Union ministers BJP leaders doing the same.Similarly when Arvind Kejriwal was called a “terrorist” by BJP MP Parvesh Verma, the former turned the tables on BJP. During his campaign, he asked the crowds whether he was a terrorist to a resounding reply of “no”.Kejriwal also sought to strike an emotional chord with the voters by narrating that when he went home on the day he was called a terrorist, his parents were upset. But they said Kejriwal was a “pakka deshbhakt” (true patriot). This was greeted with loud cheers from the crowds.Narendra Modi is known to play the religious cards off and on and also during elections. For example, just a day before the last phase of voting for the 2019 Lok Sabha election, he visited Kedarnath and, dressed as a hermit, spent the night in a cave. #ArvindKejriwalcopyingNarendraModi #Arvindkejriwalsofthindutva #similaritybetweenkejriwalandmodi दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के चुनावी कैंपने को देखें तो साफ हो जाता है कि 2012 में देश की राजनीति को बदलने आए अरविंद केजरीवाल अब खुद ही बदले बदले नजर आ रहे हैं। भारतीय राजनीति ने केजरीवाल को काफी कुछ सिखा दिया है, बदल दिया है। गौर करने की बात यह है कि आईआईटी के पूर्व छात्र रहे अरविंद केजरीवाल ने इसमें काबिले तारीफ प्रगति की है। केजरीवाल अब भारतीय राजनीति के नवसिखुआ और आम नेता नहीं बल्कि खास और पेशेवर राजनेता बन चुके हैं। ध्यान से देखें तो साफ हो जाता है कि केजरीवाल ने सबसे ज्यादा किसी से सीखा है तो वो सीखा है नरेंद्र मोदी से। बल्कि कई मामलों में तो केजरीवाल सीधे नरेंद्र मोदी के ही नक्शे कदम पर चलते नजर आ रहे हैं। लेकिन गौर करने की बात ये है कि कभी गुजरात और बनारस जाकर नरेंद्र मोदी को ललकारने वाले अरविंद केजरीवाल इस बार के दिल्ली विधानसभा चुनाव में दिल्ली में ही बैठे मोदी से ही सीधे टकराने से बचते रहे। बल्कि दिल्ली के मुख्य मंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ लेते हुए केजरीवाल ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी का आशीर्वाद चाहिए। साफ है कि केजरीवाल अब बदल गए हैं। केजरीवाल अब भारतीय राजनीति के कोई नवागंतुक नेता नहीं बल्कि मुख्य धारा के नेता बन चुके हैं। अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी आप ने इस बार जिस तरह का चुनावी कैंपेन चलाया है उससे साफ है कि अब आम आदमी पार्टी भारतीय राजनीति में अपनी स्थाई छाप छोड़ने जा रही है और इसके लिए अरविंद केजरीवाल ने जहां कांग्रेस से ये सीखा है कि उसे क्या नहीं करना है तो गुजरात के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके भाजपा नेता नरेंद्र मोदी से ये सीखा है कि क्या करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुकाबला करते-करते केजरीवाल अब खुद मोदी जैसे होते जा रहे हैं। वे हिंदुत्व का जवाब हिंदु्त्व से दे रहे हैं। केजरीवाल ने दिल्ली के विधानसभा चुनावों को बहुत चतुराई से अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक की राजनीति में नहीं बदलने दिया। कोई आश्चर्य नहीं कि पूरे चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल शाहीन बाग नहीं पहुंचे और यही नहीं वे शाहीन बाग पहुंचते पहुंचते हनुमान मंदिर पहुंच गए। टीवी चैनलों पर उनके हनुमान भक्ति के स्वर गूंजने लगे। राम भक्ति का जवाब हनुमान भक्ति से। वो भी मतदान से एक दिन पहले। आपको याद होगा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी 2019 के लोकसभा चुनाव में अंतिम चरण के मतदान से पहले केदारनाथ धाम में माथा टेका था और पूरे दिन टीवी चैनलों पर उनकी यही तस्वीरें नजर आती रही थीं। यही नहीं मतदान के दिन भी केजरीवाल ने मतदान पर जाने से पहले अपने माता-पिता का आशीर्वाद लिया और इसकी तस्वीरें भी तुरंत ही चैनलों पर आ गईं। प्रधानमंत्री मोदी भी अपने मां से मिलने गुजरात जाते रहते हैं और इसकी भी तस्वीरें मीडिया में आती रहती हैं। #howkejriwalfoughtmodi #Kejriwalbeatmodi उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के नारे से की थी, उसी तरह के स्वर दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में तीसरी बार शपथ लेते समय केजरीवाल के भाषण में दिखाई दिए। अरविंद केजरीवाल ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद अपने संबोधन में सिर्फ कुछ नपी-तुली बातें कहीं। अरविंद केजरीवाल ने कहा आज 2 करोड़ सभी दिल्ली वाले मेरे परिवार का हिस्सा हैं। हम दिल्ली को खूबसूरत बनाएंगे। हमारे विरोधियों ने जो कुछ मुझे बोला उन्हें मैंने माफ कर दिया है। इसी के साथ केजरीवाल ने दिल्ली के निर्माताओं का नाम लिया। कहा कि दिल्ली को ये लोग आगे बढ़ा रहे हैं। #User_Swatantra Jain