1️⃣ PSLV-C62 मिशन की विफलता: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए सबक PSLV-C62 मिशन की असफलता ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में शत-प्रतिशत सफलता संभव नहीं होती। इसरो की विश्वसनीयता के बावजूद तकनीकी जटिलताएँ, लॉन्च-व्हीकल के चरणों की सटीकता और मिशन-मैनेजमेंट की निरंतर समीक्षा आवश्यक है। यह घटना फेल्योर एनालिसिस, सिस्टम रिडंडेंसी और निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की भूमिका पर पुनर्विचार का अवसर देती है। 2️⃣ भारत–जर्मनी रक्षा सहयोग समझौता: रणनीतिक साझेदारी की नई दिशा भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग समझौता इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, रक्षा विनिर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह साझेदारी भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल और यूरोप के साथ बढ़ते रणनीतिक संतुलन को दर्शाती है, साथ ही चीन-रूस धुरी के बीच भारत के विकल्पों को भी सशक्त करती है। 3️⃣ बच्चों में प्रारंभिक निवेश: भारत के भविष्य की आधारशिला (एडिटोरियल) एडिटोरियल में तर्क दिया गया है कि शून्य से छह वर्ष की आयु में स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा पर निवेश, भारत के दीर्घकालिक विकास के लिए निर्णायक है। मानव पूंजी सिद्धांत के अनुसार प्रारंभिक बचपन में निवेश से उत्पादकता, नवाचार और सामाजिक समानता में वृद्धि होती है। ICDS, पोषण अभियान और NEP 2020 इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, परंतु क्रियान्वयन की गुणवत्ता सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। #EarlyChildhood #HumanCapital #EditorialAnalysis #GS2 #Essay #IndiaFutur#PSLVC62 #ISRO #SpaceTechnology #MissionFailure #GS3 #IndianSpaceProgramme#IndiaGermany #DefenceCooperation #StrategicPartnership #IndoPacific #GS2