बिल्वपत्र कब तोड़े,बिल्वपत्र तोड़ने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी,बिल्वपत्र तोड़ने से पहले जरूर देखे

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बिल्व पत्र तोड़ने का नियम बेल के पत्ते तोड़ने से पहले निम्न मंत्र का उच्चरण करना चाहिए - *अमृतोद्भव श्रीवृक्ष महादेवप्रियःसदा। गृह्यामि तव पत्राणि शिवपूजार्थमादरात्* ॥ (आचारेन्दु) भावार्थ :- अमृत से उत्पन्न सौंदर्य व ऐश्वर्यपूर्ण वृक्ष महादेव को हमेशा प्रिय है। भगवान शिव की पूजा के लिए हे वृक्ष मैं तुम्हारे पत्र तोड़ता हूँ । कब न तोड़ें बिल्व कि पत्तियां ? *अमारिक्तासु संक्रान्त्यामष्टम्यामिन्दुवासरे । बिल्वपत्रं न च छिन्द्याच्छिन्द्याच्चेन्नरकं व्रजेत* ॥ भावार्थ :- अमावस्या, संक्रान्ति के समय, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी और चतुर्दशी तिथियों तथा सोमवार के दिन बिल्व-पत्र तोड़ना वर्जित है। ★ विशेष दिन या विशेष पर्वो के अवसर पर बिल्व के पेड़ से पत्तियां तोड़ना निषेध हैं। ★ शास्त्रों के अनुसार बेल कि पत्तियां इन दिनों में नहीं तोड़ना चाहिए । ★ बेल कि पत्तियां सोमवार के दिन नहीं तोड़ना चाहिए। ★ बेल कि पत्तियां चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या की तिथियों को नहीं तोड़ना चाहिए। ★ बेल कि पत्तियां संक्रांति के दिन नहीं तोड़ना चाहिए। ★ टहनी से चुन-चुनकर सिर्फ बेलपत्र ही तोड़ना चाहिए, कभी भी पूरी टहनी नहीं तोड़ना चाहिए. पत्र इतनी सावधानी से तोड़ना चाहिए कि वृक्ष को कोई नुकसान न पहुँचे । ★ बेलपत्र तोड़ने से पहले और बाद में वृक्ष को मन ही मन प्रणाम कर लेना चाहिए । *चढ़ाया गया पत्र भी पुनः चढ़ा सकते हैं *? शास्त्रों में विशेष दिनों पर बिल्व-पत्र तोडकर चढ़ाने से मना किया गया हैं तो यह भी कहा गया है कि इन दिनों में चढ़ाया गया बिल्व-पत्र धोकर पुन: चढ़ा सकते हैं। *अर्पितान्यपि बिल्वानि प्रक्षाल्यापि पुन: पुन:। शंकरायार्पणीयानि न नवानि यदि चित्* ॥ (स्कन्दपुराण) और (आचारेन्दु) भावार्थ : - अगर भगवान शिव को अर्पित करने के लिए नूतन बिल्व-पत्र न हो तो चढ़ाए गए पत्तों को बार-बार धोकर चढ़ा सकते हैं। भगवान शंकर को विल्वपत्र अर्पित करने से मनुष्य कि सर्वकार्य व मनोकामना सिद्ध होती हैं। श्रावण में विल्व पत्र अर्पित करने का विशेष महत्व शास्त्रो में बताया गया हैं। विल्व पत्र अर्पित करने का मन्त्र : - *त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रिधायुतम्। त्रिजन्मपापसंहार, विल्वपत्र शिवार्पणम्* ॥ भावार्थ :- तीन गुण, तीन नेत्र, त्रिशूल धारण करने वाले और तीन जन्मों के पाप को संहार करने वाले हे शिवजी आपको त्रिदल बिल्व पत्र अर्पित करता हूँ । शिवलिंग पर कैसे चढ़ाएं बेलपत्र : - 1. महादेव को बेलपत्र हमेशा उल्टा अर्पित करना चाहिए, यानी पत्ते का चिकना भाग शिवलिंग के ऊपर रहना चाहिए – शिव जी को बेलपत्र अर्पित करते समय साथ ही में जल की धारा जरूर चढ़ाएं । बिना जल के बेलपत्र अर्पित नहीं करना चाहिए । 2. बेलपत्र में चक्र और वज्र नहीं होना चाहिए. | कीड़ों द्वारा बनाये हुए सफ़ेद चिन्ह को चक्र कहते हैं| एवम् बिल्वपत्र के डंठल के मोटे भाग को वज्र कहते हैं । 3. बेलपत्र 3 से लेकर 14 दलों तक के होते हैं , यह जितने अधिक पत्र के हों, उतने ही उत्तम माने जाते हैं । 4. अगर बेलपत्र उपलब्ध न हो, तो बेल के वृक्ष के दर्शन ही कर लेना चाहिए , उससे भी पाप-ताप नष्ट हो जाते हैं । 5. शिवलिंग पर दूसरे के चढ़ाए बेलपत्र की उपेक्षा या अनादर नहीं करना चाहिए । 6.बिल्वपत्र मिलने की मुश्किल हो तो उसके स्थान पर चांदी का बिल्व पत्र चढ़ाया जा सकता है जिसे नित्य शुद्ध जल से धोकर शिवलिंग पर पुनः स्थापित कर सकते हैं । भगवान शिव के अंशावतार हनुमान जी को भी बेल पत्र अर्पित करने से प्रसन्न किया जा सकता है और लक्ष्मी का वर पाया जा सकता है। घर की धन-दौलत में वृद्धि होने लगती है। अधूरी कामनाओं को पूरा करता है सावन का महीना शिव पुराण अनुसार सावन माह के सोमवार को शिवालय में बेलपत्र चढ़ाने से एक करोड़ कन्यादान के बराबर फल मिलता है। बेल के पेड़ की जरा सी जड़ सफेद धागे में पिरोकर रविवार को पहनें इससे रक्तचाप, क्रोध और असाध्य रोगों से निजात मिलेगा । मधुमेह व पेट के रोगियों को विल्व पत्र का सेवन करना चाहिए । शिवलिंग पर बेलपत्र क्यों चढ़ाते हैं? माना जाता है कि सावन महीने में नियमित रूप से बेलपत्र चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं और भक्तों की समस्त बाधांए दूर करते हैं। लेकिन यदि कोई शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हुए उनकी पूजा करता है तो उसे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है #बिल्वपत्र कब तोड़े बिल्वपत्र तोड़ने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी,बिल्वपत्र तोड़ने से पहले जरूर देखे,सोमवार को बेलपत्र क्यों नहीं तोड़ना चाहिए,बेलपत्र किस दिन नहीं तोड़ना चाहिए,बेलपत्र किस दिन तोड़ना चाहिए,बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र,सोमवार को बेलपत्र तोड़ना चाहिए,शिवलिंग पर कितने बेलपत्र चढ़ाने चाहिए,शिवजी पर बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र,MYSTERY OF DHARMA,बेलपत्र कैसे चढ़ाएं?,बेलपत्र कितने प्रकार के होते हैं?,शिवलिंग पर बेलपत्र क्यों चढ़ाते हैं?,बेलपत्र का महत्व क्या है?