जगन्नाथ मंदिर के रहस्य || Mystery of jagannath mandir #jagannathmandir #mystery #vlog

जगन्नाथ मंदिर के रहस्य || Mystery of jagannath mandir #jagannathmandir #mystery #vlog

जगन्नाथ पुरी मंदिर के रहस्य || Mysteries of jagannath mandir #jagannathtemple #jagannath temple puri #rath yatra #puri jagannath mandir #jagannath puri ka rahasya #puri jagannath temple mystery #puri jagannath temple #puri rath yatra #mystery of jagannath puri temple in odia #jagannath #jagannath puri #puri jagannath #mystery of jagannath puri temple reaction #jagannath puri mandir #jagannath puri yatra #jagannath temple India के उड़ीसा राज्य के पूरी में एक ऐसा चमत्कारिक मंदिर है, जिसके रहस्यों को, science भी आजतक समझ नहीं पाया, ना ख़ोज पाया । Science, physics, geography , यहां सब फेल हो जाते है। मुख्य चार धाम हिन्दू धर्म में माने जाते है। बद्रीनाथ धाम, द्वारकाधीश धाम, रामेश्वरम, और जगन्नाथ धाम.. या उसे ही जगन्नाथ पुरी कहा जाता है। अद्भुत और आश्चर्यकारक निलचक्र भगवान जगन्नाथ पुरी का मंदिर प्राचीन कला का अनोखा उदाहरण है।मंदिर के सबसे ऊंचे शिखर पर,अष्टधातु से बना सुदर्शन चक्र है। इसे ही नीलचक्र कहा जाता है।इसकी रचना कुछ इस तरह की गई है, की पूरी के किसी भी कोने से, किसी भी दिशा से देखो, तो ऐसे लगता है, इस चक्र का मुंह आप की ओर है। अब ये कैसे? इसका जवाब किसी के पास नहीं है... हवा की उल्टी दिशा में लहराता ध्वज... मंदिर के शिखर के ऊपर जो ध्वज है, वो हवा के विरुद्ध दिशा में लहराता नज़र आता है। ऐसा क्यों होता है.. इसका एक और रहस्य ये भी है की, मंदिर की पुजारियों द्वारा, इसे ४५ मंजिल उलटा चढ़कर रोज़ बदला जाता है... दुनियां की सबसे बड़ी रसोई ... जगन्नाथ पुरी के अन्नछत्र में, हर रोज़ २० से ३० हज़ार भक्तो के लिए प्रसाद बनाया जाता है। और गलती से भक्त १ लाख भी हो गए तो भी, प्रसाद सब को समान मिल जाता है। कभी प्रसाद कम नही पड़ता। साथ ही एक और रहस्य ये भी है, ये प्रसाद बनाने के लिए, एक के उपर एक सात बर्तन रखे जाते है, और आश्चर्य की बात ये है की, सबसे ऊपर रखे बर्तन का खाना पहले पकता है, और सबसे निचे वाले बर्तन का सबसे आखिर में। अब ये कैसे होता है इसका भी जवाब अबतक नहीं मील पाया है... नो फ्लाई झोन मंदिर.... आम तौर पे हमने देखा है, पुरानी मंदिर और मस्जिदों पर, पक्षियों के थव्वे के थव्वे मंडराते हुए नज़र आते है। लेकिन जगन्नाथ मंदिर के उपर एक भी पक्षी या, हवाई जहाज़ उड़ता नजर नही आयेगा.... मंदिर के परछाई का रहस्य.... जगन्नाथ पुरी के मंदिर की ऊंचाई लगभग २१४ फीट और चौड़ाई ४ लाख square feet इतनी है। इतना भव्य दिव्य मंदिर होते हुए भी, आश्चर्य की बात ये है की , मंदिर के शिखर की परछाई, कभी भी, जमीन पर नहीं गिरती.. इसका जवाब आज भी.. science ढूंढ रहा है.. आवाज का रहस्य.... आप को ये सुनकर निश्चित रूप से आश्चर्य होगा की,जगन्नाथ पुरी का ये मन्दिर समुंदर के इतने करीब होने के बाद भी , एकबार आप सिंह दरवाजे से मंदिर में प्रवेश करते ही, समुंदर की लहरों की आवाज गायब हो जाती है। और दरवाजे के बाहर पैर रखते ही, लहरों की आवाज फिर से सुनाई देती है। इसका जवाब ढूंढने मे भी science fail हुआ है... उलटी हवा का रहस्य... आम तौर पर, समुंदर की ओर से जमीन की ओर हवा बहती रहती है। लेकिन पुरी की नगरी में हवा उलटी दिशा से , याने..जमीन की ओर से समुंदर की ओर बहती नज़र आती है। अब ये कैसी मुमकिन है? इसका जवाब भी एक रहस्य है... मूर्तियों का रहस्य... वैसे तो एकबार मंदिर बन जाता है, तो उसमे स्थापित मूर्तियां भी कायमस्वरूप होती है। लेकिन हर १२ साल बाद जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियां बदली जाती है। भगवान जगन्नाथ की मंदिर में.., भगवान जगन्नाथ, बालभद्र, और बहन सुभद्रा इन तीनों के काष्ट याने लकड़ी के मूर्तियों का निर्माण, फिर से किया जाता है। उन्हे पहले मूर्तियों के साथ बदल दिया जाता है। अब सवाल ये उठता है, इसमें आश्चर्य की बात क्या है?.. तो आश्चर्य की बात ये है, ये नई मूर्तियां, रंगरूप और आकार, लंबाई, चौड़ाई समेत सबकुछ पहले मूर्तियों जैसे ही बन जाती है... श्रीकृष्ण के धड़कते दिल का रहस्य ... १२ साल बाद जब मूर्तियां बदली जाती है, तब सारे शहर की लाईट बंद की जाती है। पूरे शहर में अंधेरा किया जाता है। मंदिर के बाजू में मिलिट्री, CRPF और अन्य फोर्सेस तैनात किए जाते है। इसके पश्चात, एक गुप्त अनुष्ठान, नवकलेवर किया जाता है। और मुख्य पुजारियों के आंखों पर रेशम की पट्टी बांध कर मंदिर में भेजा जाता है। और पुरानी मूर्तियों में से एक ब्रम्ह पदार्थ निकाला जाता है, और नए मूर्तियों में पुरी भक्तिभाव से बिठाया जाता है। मान्यता है की , इस पदार्थ को कोई देख नहीं सकता। और गलती से किसीने ये धैर्य किया तो उसकी मृत्यु अटल है। साथ ही ये पदार्थ जिन पुजारियों द्वारा बिठाया जाता है, उनका कहना है की, देख तो नहीं सकते लेकिन, उस पदार्थ का भास किसी जीवित चीज़, जैसे की, उछलते खरगोश की तरह महसूस होता है । और कहा जाता है ये और कुछ नहीं बल्की श्रीकृष का धड़कता हृदय ही है.... रथयात्रा के रहस्य... हरसाल पुरी में, ९ दिन का त्योहार मनाया जाता है , जिसे रथयात्रा कहा जाता है। इसे ही कार महोत्सव या गुड़िंचा यात्रा के नाम से भी जाना जाता है। इस त्योहार में भगवान श्री जगन्नाथ , देवी सुभद्रा, और उनके भाई बालभद्र को गर्भगृह से निकालकर, रथपर बिठाकर यात्रा निकाली जाती है। ये रथ यात्रा मुख्य सड़क मडाडंडा से गुड़िंचा मंदिर तक ले जाया जाती है। मान्यता है के ये यात्रा निकालने का मुख्य उद्देश ये है की, भगवान इन ९ दिनों में प्रजा के बीच आकर ख़ुद उनका सुख, दुःख जान लेते है। और करोड़े भक्तो की भीड़ इस यात्रा का हिस्सा बनती है... दुर्गंध अंदर न आने का रहस्य... दोस्तो, मंदिर के बाहर एक स्वर्ग द्वार है। जहां मोक्ष प्राप्ति के लिए, शव जलाएं जाते है। जब आप मंदिर से बाहर आते है, तब आप को लाशों के जलने की बदबू महसूस होती है। और मंदिर के अंदर जाते ही, वो सारी दुर्गंध गायब हो जाती है। इसका रहस्य भी अबतक कोई खोज नहीं पाया है।