Rahman sir daroga guru , जो 11 रुपए में बना देते हैं SI, वर्दी सिलाने को पैसे भी देते हैं | LiveCit

Rahman sir daroga guru , जो 11 रुपए में बना देते हैं SI, वर्दी सिलाने को पैसे भी देते हैं | LiveCit

पटना के गुरु-रहमान, जिन्होंने तराशे सैकड़ों IAS-IPS अधिकारी रहमान सर मुसलमान होते हुए भी वे वेदों के ज्ञाता हैं, उनके गुरुकुल में वेदों की पढ़ाई भी होती है पटना के गुरु-रहमान, जिन्होंने तराशे सैकड़ों IAS-IPS अधिकारी रहमान सर मुसलमान होते हुए भी वे वेदों के ज्ञाता हैं, उनके गुरुकुल में वेदों की पढ़ाई भी होती है niraj kumar February 17, 2018 पटना के गुरु-रहमान, जिन्होंने तराशे सैकड़ों IAS-IPS अधिकारी रहमान सर मुसलमान होते हुए भी वे वेदों के ज्ञाता हैं, उनके गुरुकुल में वेदों की पढ़ाई भी होती है 2018-05-03T09:25:57+00:00Bihar, Featured Google BookmarkFacebookMore समाज में गुरु को सबसे ऊंचा स्‍थान प्राप्‍त है | हमारी भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है | “गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वर: …गुरु को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला बताया गया है | दोस्तों आज की हमारी कहानी भी बिहार के एक महान गुरु 49 वर्षीय रहमान सर की है जिन्होंने बहुत से विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा रूपी छेनी से तराश कर बड़े-बड़े पदों तक पहुँचाया | उनके इस गुरुकुल में गुरुदक्षिणा में केवल 11, 21, और 51 रुपये मात्र की परंपरा है | गुरु-रहमान (Guru Rahman Sir) -BiharStory is best online digital media platform for storytelling - Bihar | India छात्र से फीस के नाम पर मात्र 11 रुपए ली जाती है रहमान सर (Guru Rahman Sir) गरीब परिवार से हैं यही कारण है की रहमान सर गरीब छात्र-छात्राओं के दर्द को अच्छी तरह से समझते हैं |गरीब छात्रों को ही ध्यान में रखकर रहमान सर ने गुरुकुल की शुरुआत की थी |रहमान सर का मानना है की गरीबी का मतलब लाचारी नहीं, बल्कि गरीबी का मतलब कामयाबी होता है, यह कामयाबी आप अपने जोश, जूनून और समर्पण से हासिल किया जा सकता है| जो उनके गुरुकुल में लड़के करते हैं | रहमान सर (Guru Rahman Sir) से पढ़ाई करने आने वाले सभी छात्र से मात्र 11 रुपए की फीस ली जाती है | आप आश्चर्य से सोच रहे होंगे की रहमान सर इतनी कम गुरुदक्षिणा में अपना यह गुरुकुल अच्छी तरह से कैसे चला पा रहे हैं? तो आइये हम बता दें कि उनके द्वारा जो बहुत सारी सफलता की कहानियां गुरुकुल में लिखी गयी हैं, उनकी रचना उनके स्वयं के और उनके पुराने विद्यार्थियों के द्वारा दिए दान के पैसों से सम्भव हुई है | गुरु रहमान (Guru Rahman Sir) मुसलमान होने के बाद भी वेदों के ज्ञाता हैं। उनके गुरुकुल में वेदों की पढ़ाई भी होती है | 1994 में शुरू हुई थी अदम्य अदिति गुरुकुल आर्ट्स में ट्रिपल मास्टर डिग्रीज के साथ रहमान ने 1994 में अदम्य अदिति गुरुकुल की स्थापना की। और पहले ही साल उनके विद्यार्थियों ने अपना परचम लहराया। उस साल स्टेट गवर्नमेंट ऑफ़ बिहार को 4000 पुलिस इंस्पेक्टर्स की जरुरत थी और 1100 विद्यार्थी केवल इस गुरुकुल से ही चयनित हुए थे | यही नहीं बाद में अन्य प्रतियोगी परिक्षाओं में भी यहां के लड़कों ने काफी अच्छा किया | संस्थान के निदेशक रहमान सर कहते हैं की “उन्हें याद नहीं की इन वर्षों में कितनों ने सफलता प्राप्त की, लेकिन हर साल उनके अदम्य अदिति गुरुकुल से दर्जनों स्टूडेंट्स निकलते हैं |” राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत उन्हें सम्मानित कर चुके हैं रहमान सर अपने जीवन में शिक्षा के जरिये बदलाव लाने में लगे हुए हैं | रहमान सर का मानना है की शिक्षा ही एक मात्र तरीका है जिसके माध्यम से भारतीय अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो पाएंगे और समाज की मुख्य धारा से जुड़ पाएंगे | इसके साथ ही वह इस जीवन के बाद भी समाज को कुछ देकर जाने की चाह के कारण जरूरतमंद मरीजों के लिए अपने अंगों और मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए देह दान करने की घोषणा कर चुके हैं। उनके इस काम के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं | उनका यह जीवन हम सब के लिए प्रेरणा श्रोत है |