मकर संक्रांति पोराणीक कथा, सूर्य देव और भीष्म पितामह कथा

मकर संक्रांति पोराणीक कथा, सूर्य देव और भीष्म पितामह कथा

मकर संक्रांति की पावन कथा (सूर्य देव और भीष्म पितामह) मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक अत्यंत शुभ पर्व है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। उत्तरायण को देवताओं का दिन माना जाता है, इसलिए यह समय बहुत पवित्र माना जाता है। 🌞 सूर्य देव का महत्व पुराणों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि देव से मिलने उनके घर (मकर राशि) जाते हैं। शनि देव कर्म और न्याय के देवता हैं। इस दिन सूर्य और शनि के संबंधों में मधुरता का संदेश मिलता है—कि अहंकार छोड़कर संबंधों को सम्मान देना चाहिए। इसी कारण यह पर्व समता, न्याय और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। 🏹 भीष्म पितामह की कथा महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था। कुरुक्षेत्र युद्ध में वे शरशैया पर लेटे हुए थे, लेकिन उन्होंने अपने प्राण नहीं त्यागे। भीष्म पितामह जानते थे कि उत्तरायण में देह त्याग करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए वे मकर संक्रांति के दिन का इंतजार करते रहे। जब मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण हुए, तब भीष्म पितामह ने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए अपने प्राण त्यागे और मोक्ष को प्राप्त हुए। 🌼 पर्व का संदेश मकर संक्रांति हमें यह सिखाती है कि: अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना बुराई छोड़कर अच्छाई अपनाना धैर्य, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलना इसीलिए इस दिन स्नान, दान, तिल-गुड़ का सेवन और सूर्य पूजा का विशेष महत्व है। ऐसे और भक्ति के और विडियो के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें लाइक करें और विडियो शेयर करें धन्यवाद जय श्री राम जय श्री कृष्णा