सुल्तानपुर से 4 किमी. परऊपुर गांव में 109 वर्षों से संचालित रामलीला का आज शुभारंभ होगा, जिले के बंधुआ कला के कचनावां गांव से ब्राह्मण कलाकारों के कुशल प्रदर्शन से रामलीला में लगता है चार चांद, रामलीला कमेटी के वरिष्ठ संरक्षक अनिल श्रीवास्तव बताते हैं कि परऊपुर रामलीला का लीला रोमांचक रहता हैं रामायण काल में प्रस्तुत कहानी के आधार पर ही रामलीला प्रस्तुत होता है, रामलीला की तैयारी पखवारे भर शुरू हो जाती हैं वरिष्ठ जनों के नेतृत्व में मीटिंगों का दौर शुरू हो जाता है, लोगों को क्या रोल करना है सबको बांट दिया जाता है, रामलीला कमेटी के वरिष्ठ सदस्य प्रवीन श्रीवास्तव ने बताया कि रामलीला का मंचन पहले वरिष्ठ सदस्यों द्वारा होता था आस पड़ोस के गांव के लोग भी इकट्ठा होते थे आज भी वही दौर चला आ रहा है । कमेटी के युवा सदस्य आशुतोष किशोर "तनु" ने कहा कि हमारे रामलीला कमेटी के पूर्व संरक्षक स्व. अंजनी वीर श्रीवास्तव "अच्छे भैया" ताऊ जी अब हमारे बीच में नही हैं उनकी कमी हम लोगों को हमेशा खलती है, उन्होंने कहा कि हमारे रामलीला कमेटी के अभिभावक एवं पारिवारिक सदस्य स्व. गिरीश श्रीवास्तव, स्व. हरीश श्रीवास्तव का कुछ दिनों पहले निधन हो गया उनके निधन से हम रामलीला कमेटी के लोगों को कमी महसूस होती है उन लोगों का रहना ही रामलीला कमेटी का शोभा बढ़ता था । कमेटी के युवा सदस्य रोशन श्रीवास्तव ने कहा कि रामलीला के शुभारंभ के उद्घोष शुरू होते ही पर 8 से 10 किमी. दूर लोग रामलीला देखने चले आते हैं और रामलीला रविवार से शुरू होकर शनिवार को खत्म होता है और आखिरी रविवार को राम लक्ष्मण जी का शोभायात्रा निकलती है जो कि सभी गांववासियों के द्वार पर दर्शन के लिए ले जाया जाता है फिर गांव के राम मंदिर स्थित मैदान में रावण वध के साथ बड़े मेले का आयोजन होता है उसी के साथ रामलीला का समापन होता है । कमेटी की तैयारी पखवारे भर पहले पीयूष श्रीवास्तव, शनि श्रीवास्तव, सोमू श्रीवास्तव,शुभम श्रीवास्तव, प्रसून,सौरभ, जैसे युवा जिम्मेदारी सम्भालते हैं और तैयारी में लग जाते हैं,