सत्यनारायण संपूर्ण व्रत कथा, पूजा विधि,आरती,महत्व और सावधानियॉ #katha #pooja #vidhi #satya #trending आइए जानते हैं पूजा में उपयोग होने वाली समग्री के बारे में • भगवान सत्यनारायण की तस्वीर या मूर्ति • चौकी या पटा • केले के पत्ते और केले के पेड़ (यदि संभव हो) • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर का मिश्रण) • प्रसाद के लिए: सवा किलो गेहूं का आटा, सवा किलो शक्कर, घी, केले और मेवे। इसे मिलाकर पंजीरी या चूरमा बनाया जाता है। • फूल, तुलसी के पत्ते, धूप, दीप, अगरबत्ती • हल्दी, कुमकुम, चंदन, रोली • अक्षत (चावल), सुपारी, पान के पत्ते • जल से भरा कलश, नारियल • कुछ सिक्के • कपूर, माचिस पूजा की विधि • शुद्धिकरण: पूजा शुरू करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गाय के गोबर से लीपकर या गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। • वेदी की स्थापना: पूजा स्थल पर एक चौकी या पाटा रखें। उस पर एक स्वच्छ कपड़ा बिछाएं और चावल से अष्टदल कमल या स्वास्तिक बनाएं। • कलश स्थापना: चौकी के ऊपर चावल के ऊपर कलश रखें। कलश में जल भरें, उसमें सुपारी, सिक्के और कुछ फूल डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और उसके ऊपर नारियल रखें। कलश को रोली और कुमकुम से सजाएं। • देवताओं का आवाहन: सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान करें और उनसे पूजा में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें। इसके बाद नवग्रह, वरुण, और अन्य देवताओं का आवाहन करें। भगवान सत्यनारायण की पूजा: • भगवान सत्यनारायण की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें। • उनका ध्यान करें और आह्वान करें। • भगवान को आसन दें। • पैर धोने के लिए जल अर्पित करें (पाद्य)। • अर्ध्य (हाथ धोने के लिए जल) और आचमन (मुख धोने के लिए जल) दें। • पंचामृत से स्नान कराएं। • शुद्ध जल से स्नान कराएं। • वस्त्र, यज्ञोपवीत, आभूषण और फूलों की माला अर्पित करें। • चंदन, हल्दी और कुमकुम का तिलक लगाएं। • धूप, दीप और अगरबत्ती दिखाएं। • नैवेद्य (प्रसाद) अर्पित करें। आइए जानते हैं कुछ ध्यान रखने योग्य बातो के बारे मे। • व्रत के दिन सात्विक भोजन करें। • तामसिक भोजन से परहेज करें। • किसी विद्वान पंडित से पूजा और कथा का आयोजन करवाएं। • प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही भोजन करें। आरती: कथा समाप्त होने के बाद, भगवान सत्यनारायण की आरती करें। आरती गाते समय कपूर या घी का दीपक घुमाएं। आरती (“AI, इस गीत की पंक्तियाँ sweet female voice में गाकर दो, हल्के बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ") जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन-पातक-हरणा॥ रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे। नारद करत नीराजन, घंटा वन बाजे॥ ॥ जय लक्ष्मी रमणा...॥ प्रकट भए कलिकारन, द्विज को दरस दियो। बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो॥ ॥ जय लक्ष्मी रमणा...॥ दुर्बल भील कठारो, जिन पर कृपा करी। चंद्रचूड़ इक राजा, तिनकी विपत्ति हरी॥ ॥ जय लक्ष्मी रमणा...॥ वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्ही। सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर स्तुति किन्हीं॥ ॥ जय लक्ष्मी रमणा...॥ भाव-भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धर्यो। श्रद्धा धारण किन्हीं, तिनको काज सरो॥ ॥ जय लक्ष्मी रमणा...॥ मनवांछित फल दीन्हो, दीन दयालु हरि। जय लक्ष्मी रमणा...॥ चढ़त प्रसाद सवायो, कदली फल मेवा। धूप-दीप-तुलसी से, राजी सत्यदेवा॥ ॥ जय लक्ष्मी रमणा...॥ सत्यनारायण जी की आरती जो कोई नर गावे। ऋषि-सिद्ध सुख-संपत्ति सहज रूप पावे॥ ॥ जय लक्ष्मी रमणा...॥ • प्रसाद वितरण: आरती के बाद सभी भक्तों में प्रसाद (पंजीरी या चूरमा) वितरित करें। स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें। • पूजा का समापन: पूजा के अंत में भगवान से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें और उनसे अपना आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना करें। यह पूजा घर पर सरल और भक्ति भाव से की जा सकती है। यह माना जाता है कि जो कोई भी इस पूजा को पूरी श्रद्धा से करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। आप चाहे तो आसपास के किन्ही पंडित जी को बुलाकर भी घर में पूरी भक्ति भाव से यह पूजा कर सकते हैं। सनातन धर्म से जुडी रोचक कहानियो,अन्य व्रत कथाओ, पूजा विधि की संपूर्ण जानकारी के लिए हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें और कमेंट में जय श्री सत्यनारायण लिखना ना बोले धन्यवाद