गणेश रयाल देहरादून : इन दिनों जहां उत्तराखंड शिव के जयकारों से शिवमय बना हुआ है तो ऐसे में सबसे बड़ी पदयात्रा और शिवभक्ति पर खूंखार जानवर का साया है । लगभग 50 लाख कांवड़ियों पर आधा दर्जन खूंखार आदमखोर गुलदारों का खतरा मंडरा रहा है । इस खतरे को भांपते हुए वन विभाग ने अपनी तैयारियों में अतिरिक्त व्यवस्था की है तो वहीं स्थानीय लोगों की मदद के साथ-साथ कावड़ियों को भी दिशानिर्देश जारी करने के लिए पोस्टर और होर्डिंग जगह जगह लगाए जा रहे हैं । कावड़ियों को उस आदमखोर के इलाके से होकर गुजरना पड़ता है दरअसल कांवड़ियों को हरिद्वार से ऋषिकेश जाना होता है जिस आदमखोर ने अब तक लगभग 22 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया है । कांवड़ यात्रा शुरू होते ही आदमखोर गुलदार ने बिहार के एक व्यक्ति को अपना निवाला बना लिया है । देहरादून का रायवाला क्षेत्र यह वही इलाका है जहां पर बीते कई सालों से आदमखोर गुलदार ने आतंक मचाया हुआ है । रायवाला के लगभग एक दर्जन गांवों में इस गुलदार का ऐसा आतंक है कि शाम होते ही लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकलते आलम यह है कि हाईवे पर भी शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता है क्योंकि अब तक यहां रहने वाले आदमखोर गुलदार दो दर्जन से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार चुका हैं साथ ही साथ हाईवे पर चलने वाले लोगों को भी इन गुलदारों ने शिकार बनाया है । वन विभाग के साथ-साथ जिला प्रशासन के लिए यह समस्या आ गई है कि यहां से चलने वाली कावड़ यात्रा को कैसे सकुशल संपन्न किया जाए क्योंकि कावड़ यात्रा इस क्षेत्र से ना केवल दिन में चलती है बल्कि रात के अंधेरे में भी कावड़िया इसी रोड से जाते हैं। लंबी दूरी तय करने वाले कावड़िये हरा भरा जंगल देखकर यहां पर ना केवल दिन में विश्राम करते हैं बल्कि रात को भी आराम करने के लिए इस जंगल के किनारे बनी सड़क का सहारा लेते हैं इन्हीं सब को ध्यान में रखते हुए वन विभाग में अब कांवड़ियों के लिए गाइडलाइन जारी की है। मुख्य वन संरक्षक जयराज की माने तो विभाग की तरफ से आने वाले कांवड़ियों को यह दिशा निर्देश दिए गए हैं कि इस इलाके में ना रुके इतना ही नहीं कावड़ियों और स्थानीय लोगों को यह सलाह दी जा रही है कि जंगल की तरफ ना जाए । वन विभाग को यह भी डर है कि हरा भरा जंगल देखकर कावड़िया कई बार अंदर घुसने की कोशिश करते हैं अगर ऐसा हुआ तो किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते है। प्रमुख वन संरक्षक जयराज का कहना है की कावड़ मेले को देखते हुए इस पूरे इलाके में वन विभाग की पोस्ट को ज्यादा संख्या में तैनात किया गया है इतना ही नहीं लगातार इस इलाके में कांवड़ मेले के दौरान पेट्रोलिंग भी की जाएगी मोतीचूर से लेकर रायवाला तक का यह लगभग 2 किलोमीटर का मार्ग वन विभाग की टुकड़ियों से पटा होगा। दरअसल कहीं भी बाहर कावड़िया इन जंगलों में भांग की खेती को देख कर रुक जाते हैं लिहाजा वन विभाग को यह भी डर सता रहा है कि कावड़ियों की टुकड़ियों को किस तरह से सकुशल आगे बढ़ाया जाए ।इस छेत्र के लिए वन विभाग ने सरकार से अतिरिक्त वन कर्मियों को इस रेंज में तैनात करने के लिए आग्रह किया है। ये पूरा इलाका आबादी से चारों तरफ से घिरा हुआ है राजाजी टाइगर रिजर्व के कारण बाघों का कई बार खुले तौर पर यहां पहुंच जाना चिंता का कारण रहा है। लेकिन पिछले दो 3 साल से घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं हालत यह है कि अब गांव वाले अपना घर बार छोड़ने को मजबूर हैं। तो वहीं पुलिस प्रसासन ने भी इस पूरे मामले पर अपने हाथ खड़े कर दिए है । एडीजी अशोक कुमार ने साफ कह दिया है कि इस मामले में वो वन विभाग की कोई मदद नही करेंगे क्योंकि पुलिस फोर्स गुलदार या जंगली जानवरों को पकड़ने में एक्सपर्ट नही होती इस लिए वन विभाग अपना इलाका खुद ही संभाले अगर इस इलाके में फोर्स लगा भी दी जाती है तो उनके साथ ही कोई घटना घट सकती है इस लिए इस इलाके में फोर्स को नही लगा सकते हैं । लेकिन अब सवाल ये उठता है कि अगर इस रास्ते में कोई गुलदार अचनाक आ धमकता है तो ये कर्मी कैसे हालातो पर काबू पाएंगे क्योंकि इनके पास ना कोई हथियार है ना ही कोई ऐसी तकनीक जिससे जानवर को वो भगा सके, सिर्फ हाथो में लाठी लेकर ये सभी अपनी ड्यूटी निभा रहे है । आने वाले दिनों में कांवड़ियों की संख्या और बढ़ेगी । अगर कांवड़ियों की बात की जाए तो इस रास्ते से निकलने में उन्हें भी डर लग रहा है ।शिव भक्तो का कहना है की उनके साथ उनके महादेव हैं लिहाजा वो सुरखित अपनी यात्रा को कर पाएंगे । --- प्रभावित गावँ जो आदमखोर से हैं सहमें । (रायवाला, प्रतितनगर, लच्छीवाला, खंडग़ांव, हरिपुर, मोतीचूर, श्यामपुर, खदरी, खैरी, कांसरो, गौरीगांव, नेपालिफार्म, वीरभद्र, गूलर) एक नज़र जहां गुलदार ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया है। “29 मार्च 14 प्रतितनगर अनिकेत, 24 अक्टूबर 14 - रायवाला- काशीराम नौटियाल, 12 फरवरी 15 - खांडग़ांव- दीपिका 29 मार्च 15 - गूलर- राजकुमार, 8 जून 15- गूलर- ऋषिकुमार, 15 जून 15 श्यामपुर पुष्कर सिंह, 6 सितम्बर 15- गूलर- सोनू सिंह, 25 फरवरी 16- हरिपुर- साहिल खान, 28 सितम्बर 16- गूलर- रोहित क्षेत्री, 18 नवम्बर 16- श्यामपुर- सोमपाल 19 मई 17 - श्यामपुर-आनंद सिंह, 19 दिसम्बर 17- रायवाला- अज्ञात, 27 दिसंबर 17- रायवाला – अज्ञात, 2 फेब 18 - राइवल महिला, 5 मई 18 – नेपालिफार्म” इसके अलावा जून में भी दो व्यक्तियो को ये गुलदार मौत के घाट उतार चुका है ।