जय श्री राधे कृष्ण जी । जय श्रीमद्भागवत महापुराण की । पिछले काफी समय से आप श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा को हमारे चैनल पर सुन रहे हैं । इसके लिए आप सब का हार्दिक धन्यवाद है । आज से हम आपको श्रीमद्भागवत महापुराण के आठवें स्कन्ध की कथा सुनाना आरंभ कर रहे हैं । आज श्रीमद् भागवत महापुराण के सातवें स्कंध के अध्याय - 8 की कथा हम आपको सुना रहे हैं । आज की इस कथा में श्री शुकदेव जी महाराज द्वारा राजा परीक्षित को देवताओं और दैत्यों द्वारा मिलकर समुद्र मंथन के आरंभ की कथा सुनाई गई है । समुद्र मंथन में से ऐरावत हाथी , अप्सरा , माता महालक्ष्मी और धन्वंतरी वैद्य आदि निकले थे । धन्वंतरी वैद्य के हाथ में अमृत कलश था । जिसको दैत्यों ने बलपूर्वक छीन लिया देते उसे अमृतकलश लेने के लिए भगवान ने मोहिनी रूप का अवतार ग्रहण किया था । श्रीमद्भागवत महापुराण की बड़ी दिव्य कथा है यह । यह सारी कथा आज जरूर सुनें । आप सबका हार्दिक धन्यवाद । #भगवान_का_मोहिनी_अवतार_ग्रहण_करना #मोहिनी_अवतार_की_कथा #समुद्र_मंथन_में_से_माता_महालक्ष्मी_की_उत्पत्ति #समुद्र_मंथन_की_कथा #देवताओं_और_दैत्यों_द्वारा_समुद्र_मंथन #भगवान_द्वारा_ग्राह_का_संहार #भगवान_द्वारा_गजेंद्र_की_रक्षा_करना #ग्राह_और_गजेंद्र_की_कथा #गजेंद्र_की_रक्षा_भगवान_द्वारा_किया_जाना #भगवान_की_भक्ति_की_महिमा #धर्म_का_विस्तारपूर्वक_वर्णन #सभी_धर्मों_का_वर्णन #श्रीमद्भागवत_महापुराण_कथा #श्रीमद्भागवत_कथा #Mandir_Shri_Bansi_Wale_Mahatma