कोरोना ने दुनिया को हिला रख दिया है हर रोज हर लम्हा मौतों में इजाफा होता जा रहा है तक़रीबन दुनिया लॉक डाउन है पूरी तरह बाजार ठप्प है लोग घरों में बंद है प्रधानमंत्री ने कहा के आप अपने घरों के सामने लक्ष्मण रेखा को खींचे पर शायद प्रधानमंत्री को इसका ख्याल नहीं रहा होगा के देश के तिस करोड़ से ज़्यादा की आबादी बिना छत के रहती है जब घर ही नहीं तो लक्ष्मण रेखा कहाँ से खींचे मजदूरों को इनके घरों को जाने पर मजबूर किया जा रहा है हुकूमत की जानिब से जो जहां है वहाँ रहे के ऐलान के बाद इन गरीब मजदूरों को गाँव से निकला जा रहा है बेलगाम शहर से भी कई लोग बंगलौर की तरफ तो कोल्हापुर से बैंगलोर की तरफ पैदल जानेवालों के काफिले देख सकते है गोवा से बीजापुर जानेवाले जब भूके प्यासे बेलगाम शहर पहुंचे तो इनमे कोई ताकत नहीं थी इन पर पुलिस ज़ुल्म अलग से किया गया था जिनमे मासूम बच्चे भी है बूढ़े भी है इनका कहना है के इन्होने कहा के गोवा पोलिस ने इन्हे बेरहमी से पिट कर गाँव से बहार खदेड़ दिया आज भी बेलगाम के सतरा अफ़राद गोवा के जज़ीरे में है और इनके पास खाने पिने की कोई रसद नहीं है और हुकूमत से फरियाद कर रहे है के हमें कर्णाटक वापिस भेज दे मालिक इन्हे जाने के लिए कह रहे है इसी तरह से महारष्ट्र से भी कर्नाटक में दाखिल होनेवाले मजदूरों की तायदाद बेहिसाब है सवाल यही उठता है के क्या यही असली भारत है कोरोना से लड़ने की बात की जा रही है और अचानक नोटबंदी की तरह लॉक डाउन का फैसला लिया जाता है देहली उत्तरप्रदेश बिहार में तो सडकों पर इंसानी समुन्दर देख सकते है क्या आखिर प्रधानमंत्री को इसका बिलकुल अहसास नहीं था क्या यह हुकूमत की जानिब से लॉक डाउन का फैसला बहोत बड़ी गलती नहीं है रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में कम मरीज पाए जा रहे है यह इसलिए भी के हमारे यहाँ टेस्ट बहोत कम लोगों का हो रहा है भारत में अब तक सिर्फ पंधरा हजार लोगों का टेस्ट हुआ है वही दूसरी ओर कोरिया जैसे छोटे मुल्कों में तीन लाख लोगों का टेस्ट किया गया है अगर भारत में कसीर तायदाद में टेस्ट किये जाय तो यहाँ पर भी बिस फीसद मरीजों में इजाफा हो सकता है क्यों के टेस्ट न करना याने मालूमात का जाहिर ना होना है मान लिया जाय के अगर हजारो की तायदाद में मरीज पाए जाने लगे हो सकता है जिस कदर घनी आबादीवाला हमारा देश है मरीज पाए जाते है तो क्या हमारे पास इन मरीजों को रखने के लिए अस्पताल है सेल्फ क्वारंटाइन के लिए घरों में रहने का फैसला लिया गया है हर तरह के इजलास पर भी पाबन्दी लगा दी है फ़ौज में भी अब कोरोना को लेकर एहतियात बरते जा रहे है सवाल यह भी उठता है के जो मजदुर लाखो की तायदाद में सडकों पर निकले है और सेंकडो कोलोमीटर का फैसला तय कर अपने घर पहुंचेंगे उनके लिए यह फैसला करना बेहद मुश्किल है के क्या कोरोना से मरे या भूख से मरे यह इसलिए भी कहना ज़रूरी है क्यों के बाहरी मुल्कों में बड़ी बड़ी फैक्टरियां मास्क बनाने में जुडी है मत