#vrindavan #krishna #radha #Radhakrishna Thank you for watching video ❤️ Prem Mandir Vrindavan: मथुरा के वृंदावन में स्थित प्रेम मंदिर पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. इस मनमोहक मंदिर को देखने के लिए देश और विदेश से लोग वृंदावन आते हैं.इस मंदिर की सुंदरता हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती है. यही वजह है कि भक्त यहां पर घंटो रूकने के लिए मजबूर हो जाते हैं. तो चलिए आज हम आपको बताते हैं इस मंदिर से जुड़ी कुछ रहस्मयी बातें जो आपने शायद ही कभी सुनी होगी...... वृंदावन का ये प्रेम मंदिर भगवान श्री कृष्ण – राधा और राम-सीता को समर्पित है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस भव्य मंदिर की संरचना पांचवें जगदगुरु कृपालु महाराज द्वारा स्थापित की गई थी. मंदिर पूरे एक हजार मजदूरों द्वारा 11 सालों में बनाकर तैयार किया गया था. इस भव्य औऱ खूबसूरत मंदिर का निर्माण जनवरी 2001 में शुरू किया गया था और इसका उद्घाटन समारोह 15 फरवरी से 17 फरवरी 2012 तक किया गया. फिर 17 फरवरी को इसे सार्वजनिक रूप से खोला दिया गया था. इस मंदिर की ऊंचाई 125 फीट की है और लंबाई 122 फीट है. वहीं मंदिर की चौड़ाई करीब 115 फीट है. ये मंदिर संगमरमर के पत्थरों से बनाया गया है जोकि इटली से मंगवाए गए थे. इस प्रेम मंदिर में 94 कलामंडित स्तंभ हैं, जो किंकिरी और मंजरी सखियों के विग्रह को दर्शाते हैं. इसके अलावा मंदिर की सतरंगी रोशनी भी भक्तों को काफी आकर्षित करती हैं. इस मंदिर में देश के अलावा विदेश से भी लोग आते हैं. होली औऱ दीवाली में मंदिर का नजारा देखने लायक होता है. इस मंदिर का मुख्य आकर्षण श्री कृष्ण की मनोहर झांकियां और सीता-राम का खूबसूरत फूल बंगला है. मंदिर में फव्वारे, श्रीकृष्ण और राधा की मनोहर झांकियां, श्रीगोवर्धन धारणलीला, कालिया नाग दमनलीला, झूलन लीलाएं बहुत ही खूबसूरत ढंग से दर्शाई गई है. इस मंदिर खासियत ये भी है कि ये दिन में बिल्कुल सफेद दिखाई देता है और शाम को ये अलग-अलग रंग में नजर आता है. बता दें कि यहां पर स्पेशल लाइटिंग लगाई गई है जिसकी वजह से हर 30 सेकेंड में मंदिर का रंग बदल जाता है. मंदिर में सत्संग के लिए एक विशाल भवन का निर्माण किया गया है. जिसमें एक साथ 25000 हजार लोग बैठ सकते हैं. इस भवन को प्रेम भवन कहा जाता है. जोकि साल 2018 में आम लोगों के लिए खोल दिया गया था. अगर आप ट्रेन से वृंदावन आ रहे हैं तो यह 12 किलोमीटर की दूरी पर है. मथुरा रेलवे स्टेशन से ऑटो के जरिए आप प्रेम मंदिर पहुंच सकते हैं. इसके अलावा आप अपने निजी वाहन से आ रहे हैं और यमुना एक्सप्रेसवे आपका रूट है तो आप माट एक्सप्रेसवे कट से वृंदावन में एंट्री कर सकते हैं. मथुरा के वृंदावन में निर्मित प्रेम मंदिर पांचवें जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा बनवाया गया था। जगद्गुरु कृपालु महाराज श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे और इसी कारण उन्होंने श्रीकृष्ण के प्रेम के प्रतीक कहे जाने वाले प्रेम मंदिर का निर्माण कराया था प्रेम मंदिर वृंदावन, मथुरा, भारत में एक हिंदू मंदिर है। इसका रखरखाव जगद्गुरु कृपालु परिषद द्वारा किया जाता है, जो एक अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी, शैक्षिक, आध्यात्मिक, धर्मार्थ ट्रस्ट है। इसका निर्माण जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा भगवान कृष्ण और राधा के मन्दिर के रूप में करवाया गया है। प्रेम मन्दिर का लोकार्पण १७ फरवरी को किया गया था। इस मन्दिर के निर्माण में ११ वर्ष का समय और लगभग १०० करोड़ रुपए की धन राशि लगी है। मंदिर, धार्मिक पूजा के लिए निर्मित भवन। अधिकांश ईसाई धर्म अपने पूजा स्थलों को चर्च कहते हैं; कई धर्म मंदिर का उपयोग करते हैं, जो समय के लिए लैटिन शब्द से अंग्रेजी में लिया गया शब्द है, क्योंकि रोमनों के लिए बलिदानों के उचित समय का महत्व है। प्रेम मंदिर का इतिहास राधा कृष्ण की लीलाओं को पूरे मंदिर के बाहरी दीवारों पे बनाया गया है। इस मंदिर के मुख्य द्वार पर आठ मयूरो के नक्शीदार तोरण लगाए गए है। इसकी अंदर की दीवारों में कृपालु महाराज की झांकियां भी बनाई गई है। इस मंदिर में 94 स्तंभ बनाए गए है और इस स्तंभों पर राधाकृष्ण की लीलाओ की झांकियां दिखाई गई है, तथा गोपियों की मूर्तियां भी बनाई गई है। इस मंदिर में एक गर्भगृह बनाया गया है, जिसमे अंदर और बाहर श्रेष्ठ नक्शीकाम किया गया है। इसके संगमरमर की शिलाओं पर राधा कृष्ण के गाने लिखे गए है। प्रेम मंदिर एक अत्यंत आध्यात्मिक मंदिर है। इसमें रखी राधा कृष्ण की मूर्ति के दर्शन मात्र से भक्तो को अत्यंत शुकून और शांति मिलती है। इस मंदिर में राधा कृष्ण की मूर्ति के सामने बैठकर ध्यान करने की भी व्यवस्था है। इस मंदिर के चारो तरफ कृष्णमई माहोल बना रहता है। मंदिर में बनाई गई राधा कृष्ण लीला की छवियां अत्यंत मोहित करने वाली है। वृंदावन में प्रेम मंदिर, कृष्ण बलराम मंदिर, पागल बाबा का मंदिर कुछ ऐसे प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां श्रद्धालुओं के लिए रुकने का अच्छा व्यवस्था किया गया है। इसके अलावा आपको वृंदावन में एक से एक धर्मशाला और सराय मिल जाएंगे, उनमें से कुछ ₹500 से भी कम में उपलब्ध है वृंदावन में तकरीबन 5000 छोटे-बड़े मंदिर हैं. कुछ मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराने हैं वर्ष 1515 में महाप्रभु चैतन्य ने यहां के कई मंदिरों की खोज की थी. तब से लेकर अब तक कई मंदिर नष्ट हो चुके हैं और कई नए बने. वृंदावन में तकरीबन 5000 छोटे-बड़े मंदिर हैं श्री पर्यावरण बिहारी जी का मंदिर बड़े प्राचीन हैं । इसके अतिरिक्त यहाँ श्री राधारमण, श्री राधा दामोदर, राधा श्याम सुंदर, गोपीनाथ, गोकुलेश, श्री कृष्ण बलराम मन्दिर, पागलबाबा का मंदिर, रंगनाथ जी का मंदिर, प्रेम मंदिर, श्री कृष्ण प्रणामी मन्दिर, अक्षय पात्र, वैष्णो देवी मंदिर। भक्तों के बीच यह आम धारणा है कि निधिवन अभी भी रात के समय राधा कृष्ण की रासलीला (नृत्य) देखता है और इस प्रकार, किसी को भी रात में निधिवन के परिसर के अंदर रहने की अनुमति नहीं है। साइट में कई तुलसी (तुलसी) के पेड़ हैं जो ऊंचाई में कम हैं धन्यवाद