BG 12.17 Gita Class 12.17 Bhagwat Gita class 12.17 bhagavad gita 12.17 bhagwad 12.17 gita 12.17 BG 12.17 chapter 12 bg 12.17 vedabase bg 12.17 गीता 12.17 rupanuga das Iskcon Deoghar NHC BG 12.17 LIVE Bhagvat Gita Class 12.17 Day 297 Gita 12.17 गीता 12.17 Rupanuga Das #GitaClass #bhagwadgyan #BhagwatKatha #Bhagvadgita #bhagwadgita #rupanugadas chapter 12 gita class geeta class अध्याय 12 : भक्तियोग श्लोक 12.17 यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति | श्रुभाश्रुभपरित्यागी भक्तिमानयः स मे प्रियः || १७ || यः - जो; न - कभी नहीं; हृष्यति - हर्षित होता है; न - कभी नहीं; द्वेष्टि - शोक करता है; न - कभी नहीं; शोचति - पछतावा करता है; न - कभी नहीं; काङ्क्षति - इच्छा करता है; शुभ - शुभ; अशुभ - तथा अशुभ का; परित्यागी - त्याग करने वाला; भक्ति-मान् - भक्त; यः - जो; सः - वह है; मे - मेरा; प्रियः - प्रिय | भावार्थ जो न कभी हर्षित होता है, न शोक करता है, जो न पछताता है, न इच्छा करता है, तथा शुभ तथा अशुभ दोनों प्रकार की वस्तुओं का परित्याग कर देता है, ऐसा भक्त मुझे अत्यन्त प्रिय है | तात्पर्य शुद्ध भक्त भौतिक लाभ से न तो हर्षित होता है और न हानि से दुखी होता है, वह पुत्र या शिष्य की प्राप्ति के लिए न तो उत्सुक रहता है, न ही उनके न मिलने पर दुखी होता है | वह अपनी किसी प्रिय वस्तु के खो जाने पर उसके लिए पछताता नहीं | इसी प्रकार यदि उसे अभीप्सित की प्राप्ति नहीं हो पाती तो वह दुखी नहीं होता | वह समस्त प्रकार के शुभ, अशुभ तथा पापकर्मों से सदैव परे रहता है | वह परमेश्र्वर की प्रसन्नता के लिए बड़ी से बड़ी विपत्ति सहने को तैयार रहता है | भक्ति के पालन में उसके लिए कुछ भी बाधक नहीं बनता | ऐसा भक्त कृष्ण को अतिशय प्रिय होता है | Join Rupanuga Das On Telegram https://t.me/bhagwatcharcha =================== Join / Follow Rupanuga Das on Instagram htps://www.instagram.com/rupanugadas.rgm/ Join Rupanuga Das On Facebook. / rupanugadasi... Join Rupanuga Das On Twitter. / rupanugadasrgm Join Rupanuga Das On Whatsapp https://chat.whatsapp.com/EW1lcGNsvor... #iskcon #iskcondeoghar #iskcondeogharNHC #RupanugaDas #rupeshroshankatha #rupeshprabhukatha #rupeshroshan #ramkatha #bhagwatkatha #bhagwadkatha