1905 में बंगाल का विभाजन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना थी। 19 जुलाई 1905 को भारत के तत्कालीन वायसराय Lord Curzon ने बंगाल विभाजन की घोषणा की और 16 अक्टूबर 1905 को इसे लागू किया गया। इस विभाजन के तहत बंगाल को पश्चिमी बंगाल और पूर्वी बंगाल में बाँटा गया। ब्रिटिश सरकार ने इसे प्रशासनिक सुविधा बताया, लेकिन वास्तविक उद्देश्य फूट डालो और राज करो की नीति के तहत हिंदू–मुस्लिम विभाजन पैदा करना था। इस निर्णय का व्यापक विरोध हुआ और इसी के परिणामस्वरूप स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसमें विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने पर ज़ोर दिया गया। स्वदेशी आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण चरण बना, जिसे आगे चलकर Mahatma Gandhi ने जन-आंदोलन का रूप दिया। अंततः 12 दिसंबर 1911 को वायसराय Lord Hardinge के समय बंगाल का पुनर्गठन किया गया और विभाजन रद्द कर दिया गया। 📚 यह वीडियो UPSC, SSC, State PCS, CUET, NET/JRF और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 👉 ऐसे ही इतिहास और करंट अफेयर्स के वीडियो के लिए e-exams चैनल को सब्सक्राइब करें।