"क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति? जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा"

"क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति? जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा"

"मकर संक्रांति: पौराणिक कथा और परंपराओं का अद्भुत संगम" मकर संक्रांति सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और पौराणिक इतिहास की गहराई में समाया एक विशेष अवसर है। इस दिन को धर्म की विजय और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। हिंदू पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दैत्यराज बलि को पाताल लोक भेजा और धर्म की स्थापना की। यही दिन धर्म और अधर्म के बीच संतुलन का प्रतीक बन गया। सूर्य देवता का मकर राशि में प्रवेश इस दिन को और खास बनाता है। यह समय सूर्य देव के अपने पुत्र शनि देव से मिलने का होता है, जो मकर राशि के स्वामी हैं। यह पिता-पुत्र के रिश्तों में सामंजस्य और सभी मतभेदों को भुलाने का प्रतीक है। महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने इच्छामृत्यु का वरदान मकर संक्रांति के शुभ दिन पर प्रयोग किया और मोक्ष प्राप्त किया। यही कारण है कि इस दिन को मोक्ष प्राप्ति का दिन भी माना जाता है। भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति को अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल, पंजाब में लोहड़ी, असम में बिहू, गुजरात में उत्तरायण और ओडिशा में मकर बैसाखी के नाम से जाना जाता है। यह त्योहार न केवल धार्मिक और पौराणिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और आनंद का प्रतीक भी है। इस वीडियो में जानिए मकर संक्रांति से जुड़ी अनसुनी पौराणिक कथाएं, इस दिन का महत्व, और कैसे यह त्योहार पूरे भारत में विभिन्न रंगों और रूपों में मनाया जाता है। यह वीडियो आपको इस शुभ दिन के इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास करेगा। #sanatandharma #hindumythology #lordvishnu #hinduism #makarsankranti