मान्यता है कि गोवर्धन की परिक्रमा करने से व्यक्ति को इच्छानुसार फल मिलता है। वल्लभ संप्रदाय में भगवान कृष्ण के उस स्वरूप की पूजा की जाती है, जिसमें उन्होंने गोवर्धन पर्वत उठा रखा है। ऐसी भी मान्यता है कि जो इच्छा मन में रखकर इस गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की जाती है, वह इच्छा जरूर पूरी होती है। पवित्र गोवर्धन पर्वत की कहानी बेहद रोचक है। यह वही पर्वत है जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी एक उंगली पर उठा लिया था और लोगों की रक्षा की थी। इसके रोज घटने के पीछे भी एक रोचक कहानी है। कहा जाता है कि पुलस्त्य ऋषि के शाप के कारण यह पर्वत एक मुट्ठी रोज कम होता जा रहा है। अब इसकी ऊंचाई 179 मीटर हो गई है। इस पर्वत की परिक्रमा कर लोग भगवान श्रीकृष्ण की अराधना करते हैं। इसकी परिक्रमा के दौरान 7 किमी का हिस्सा राजस्थान में आता है और बाकी का हिस्सा उत्तर प्रदेश में है। बेहद पुरानी मान्यता है कि गिरिराजजी की सुंदरता को देख पुलस्त्य ऋषि बेहद खुश हुए। उन्होंने इन्हें द्रोणांचल पर्वत से उठाया और अपने यहां ले जाने लगे। उठाने से पहले गिरिराजजी ने कहा था कि आप मुझे जहां भी पहली बार रखेंगे मैं वहीं स्थापित हो जाऊंगा। रास्ते में साधना के लिए ऋषि ने पर्वत को नीचे रख दिया। ऋषि की लाख कोशिशों के बाद भी पर्वत हिला नहीं। इसके बाद गुस्से में ऋषि ने पर्वत को शाप दिया कि वह रोज कम होगा। माना जाता है कि उसी समय से गिरिराज जी वहां हैं और कम होते जा रहे हैं। दूसरी मान्यता यह भी है कि जब राम सेतुबंध का कार्य चल रहा था तो हनुमानजी इस पर्वत को उत्तराखंड से ला रहे थे, लेकिन तभी देव वाणी हुई की सेतुबंध का कार्य पूरा हो गया है, यह सुनकर हनुमानजी इस पर्वत को ब्रज में स्थापित कर दक्षिण की ओर पुन: लौट गए। भगवान कृष्ण ने क्यों उठाया था पर्वत? वृंदावन निवासी अच्छी फसल के लिए इंद्र देवता की पूजा किया करते थे और धूमधाम से उत्सव मनाया जाता था. भगवान इंद्र सभी देवताओं में सबसे उच्च हैं और साथ ही उन्हें स्वर्ग का राजा कहा जाता है. कथा के मुताबिक भगवान इंद्र को अपनी शक्तियों और पद पर घमंड हो गया था जिसे चकनाचूर करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने एक लीला रची. श्री कृष्ण ने वृंदावन के लोगों को समझाया कि गोवर्धन पर्वत की उपजाऊ धरती के कारण ही वहां पर घास उगती है जिसे उनकी गाय, बैल और पशु चरते हैं. जिसके बाद उन्हें उससे दूध मिलता है साथ ही वो खेत को जोतने में मदद करते हैं. भगवान कृष्ण ने वृंदावन वासियों को समझाया कि वो भगवान इंद्र की पूजा छोड़कर गोवर्धन पर्वत की पूजा करें. यह सुनकर भगवान इंद्र बहुत ज्यादा गुस्से में आ गए और उन्होंने वृंदावन पर मूसलाधार बारिश की. इंद्र के प्रकोप से बचने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने अपने बाएं हाथ की कनिष्ठ उंगली यानी छोटी उंगली पर पूरे गोवर्धन पर्वत को उठा लिया. सभी वृंदावन वासी उस पर्वत के नीचे आ गए और खुद को भारी बारिश से बचा लिया. इंद्र 7 दिनों तक पानी बरसाते रहे लेकिन आखिर में उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ. भगवान इंद्र खुद धरती पर उतरे और श्री कृष्ण से माफी मांगी Video Highlights How many km is Govardhan Parikrama ? How long does it take to complete Govardhan Parikrama ? Where does Govardhan Parikrama start ? How is Parikrama done ? Did Krishna lift Govardhan mountain ? Govardhan Parikrama karne ke Niyam Govardhan Parikrama Marg map #Govardhan_Parvat_Parikrama #Govardhan_hill #Govardhan_Parikrama #Govardhan_puja #Govardhan_Parvat_Krishna #Trending_videos #Manmauji_Talk #Govardhan_Parvat_kahan_hai #Govardhan_Parikrama_Marg Thanks for watching..🙏🙏